दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दाखिल आपराधिक मानहानि मामले में दोषी करार दी गई नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर साकेत कोर्ट 2 अप्रैल को फैसला सुनाएगा. मामले की सुनवाई करने वाले जज ट्रेनिंग पर गए है, जिसके चलते फैसला 2 अप्रैल को सुनाया जाएगा. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने दोनों पक्षों की जिरह के बाद 5 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखने का फैसला किया है.
दिल्ली के उप राज्यपाल की ओर से पेश वकील ने कही ये बात
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली के उप राज्यपाल की ओर से पेश वकील ने मेधा पाटकर को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा था कि मेधा पाटकर की याचिका सुनवाई योग्य नही है, उसे खारिज कर देना चाहिए. क्योंकि मेधा पाटकर ने अपनी याचिका में हस्ताक्षर नही किया है. जिसपर कोर्ट ने मेधा पाटकर से अपील की कॉपी पर हस्ताक्षर के साथ जज की आधिकारिक ईमेल पर मेल भेजने को कहा था.
2001 में आपराधिक मानहानि का किया था मुकदमा
बता दें कि मेधा पाटकर के खिलाफ दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने वर्ष 2001 में आपराधिक मानहानि का मुकदमा किया था. उस समय वे अहमदाबाद स्थित एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे. मेधा पाटकर को सजा देने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल वी.के सक्सेना के वकील ने उन्हें अधिकतम सजा देने की मांग की थी. वहीं दूसरी ओर पाटकर के वकील ने कहा था कि उन्होंने समाज के लिए बहुत काम किया है. उन्हें कई अवार्ड मिले है. उनकी उम्र काफी हो गई है, लिहाजा अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें रिहा कर दिया जाए.
सक्सेना ने पाटकर के खिलाफ दायर की थी शिकायत
सक्सेना ने पाटकर के खिलाफ 25 नवंबर 2000 को अहमदाबाद की एक अदालत में मानहानि का शिकायत किया था और उसमें पाटकर की एक प्रेस नोट का हवाला दिया था. प्रेस नोट देशभक्त का असली चेहरा शीर्षक से था और उसमें कहा गया था कि हवाला लेन देन से दुखी वीके सक्सेना खुद मालेगांव आये. एनबीए की तारीफ की और 40 हजार रुपए का चेक दिया. लेकिन चेक भुनाया नहीं जा सका और बाउंस हो गया. जांच करने पर बैंक ने बताया कि खाता मौजूद ही नही है.
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सक्सेना कायर है, देशभक्त नहीं- मेधा पाटकर
मेधा पाटकर ने यह भी कहा था कि सक्सेना कायर है, देशभक्त नहीं. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि मेधा पाटकर की हरकतें जानबूझकर और दुर्भाग्यपूर्ण थी, जिसका उद्देश्य सक्सेना की छबि को धूमिल करना था. इससे उनकी छवि और साख को काफी नुकसान पहुंचा है. उनके लगाए गए आरोपी भी न केवल मानहानिकारक है, बल्कि नकारात्मक धारणाओं को भड़काने के लिए भी गढ़े हुए है. इसके अलावा यब आरोप है कि शिकायतकर्ता गुजरात के लोगों और उनके संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रखा रहा है. यह उनकी ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा पर सीधा हमला है.
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