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प्रयागराज के माघ मेला विवाद के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से दुर्व्यवहार पर याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘लॉ एंड ऑर्डर राज्य का काम’

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों एवं धार्मिक छात्रों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और धार्मिक छात्रों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. जो  देखेगी. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील उज्ज्वल गौड़ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी.

दायर जनहित याचिका में धार्मिक गुरुओं पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे. याचिका में यह भी कहा गया था कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) न होने और पुलिस को मिली बेलगाम विवेकाधीन शक्तियों को चुनौती दी गई थी. याचिका में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 24 (धर्म की स्वतंत्रता) का घोर उल्लंधन बताया गया था. याचिकाकर्ता के अनुसार के क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक है, तथा मानव गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं.

याचिका में आरोप था कि वीडियों में नाबालिगों को शिखा से खींचा गया, उनके साथ सार्वजनिक रूप से हिंसा की गई और एक संन्यासी को इतना पीटा गया कि उनके वस्त्र फट गए.

पालकी यात्रा के दौरान हंगामा

बता दें कि माघ मेले के सबसे पवित्र स्नान दिवस मौनी अमावस्या को प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे. इस दौरान उनके साथ मौजूद नाबालिग ब्रह्मचारी वेदपाठी बटुक और संतों के साथ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर घसीटना, मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया.

इस घटना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लेटर पिटीशन भेजकर 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर हुई घटना की सीबीआई से जांच कराने और प्रयागराज कमिश्नर, डीएस, पुलिस कमिश्नर व मेला अधिकारी को निलंबित करने का आदेश देने की मांग की है.

यह लेटर पिटीशन वकील गौरव द्विवेदी ने भेजा है. याचिका में नाबालिग ब्रह्मचारी वेदपाठी बटुकों की पुलिस हिरासत में मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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