देश भर के न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों के सुचारू संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने देशभर के विभिन्न ट्रिब्यूनलों में कार्यरत उन अध्यक्षों, प्रमुखों और सदस्यों को बड़ी राहत दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों, प्रेसिडेंटों और सदस्यों के सेवा कार्यकल को आगामी 8 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने यह फैसला इसलिए दिया है ताकि ट्रिब्यूनलों के काम काज में किसी तरह की रुकावट या बाधा पैदा न हो. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने ट्रिब्यूनल प्रमुखों और सदस्यों के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के इस रुख और फैसले पर सहमति जताई है.
मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाना आवश्यक- सुप्रीम कोर्ट
केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद कोर्ट ने इस अंतरिम आदेश पर मुहर लगाई है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चयन समिति की बैठक 8 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें नई नियुक्तियों और कार्यकाल विस्तार पर चर्चा की जाएगी. ऐसे में तब तक मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाना जरूरी है, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का तात्कालिक वजह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक न्यायिक सदस्य का कार्यकाल था, जो इस साल जून में समाप्त हो रहा है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नई नियुक्तियों और आगे के सेवा विस्तार पर विचार करने के लिए चयन समिति की बैठक से पहले से ही 8 सितंबर को निर्धारित है. इस आगामी बैठक में आधिकारिक नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे देश के ट्रिब्यूनल के नेतृत्व को लेकर एक स्थायी और स्पष्ट खाका तैयार हो सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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