सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनवाई के बाद संतुष्टि जाहिर की है. कोर्ट ने कहा कि हम आदित्य आनंद और रूपेश रॉय की न्यायिक हिरासत जारी रखने का आदेश देते है.
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि आरोपी के साथ ऐसा व्यवहार ना करें. जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वे मजदूर नहीं है, हर किसी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए.
पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई का आरोप
इसी बीच मामले की सुनवाई के दौरान वकील शाहरुख आलम ने कहा कि एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद से लगातार गिरफ्तारियां हो रही है. 12 मई को मेरे खिलाफ निवारक नजरबंदी आदेश जारी किया गया है. एनएसए की धारा 3 के तहत इसपर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नजरबंदी आदेश को चुनौती नहीं दी गई है? एएसजी ने कहा कि मुझे बताया गया है कि उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है. कोर्ट आनंद के भाई केशव आनंद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है.
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले महीने नोएडा में औधोगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन को भड़काने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने आदित्य आंनद के साथ हिरासत में मारपीट की. आदित्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील देते हुए कहा था कि वह एक फैक्ट्री में इंजीनियर हैं और बच्चों के लिए लाइब्रेरी चलाते हैं. उन्होंने कहा था कि आदित्य के भाषण केवल श्रमिकों के अधिकारों पर केंद्रित थे और इसके रिकॉर्डेड सबूत मौजूद हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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