Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड मामले में दोषी सुरेंद्र कोली की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड मामले में दोषी सुरेंद्र कोली की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर की गई थी.

Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड मामले में दोषी सुरेंद्र कोली की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर की गई थी. कोर्ट ने यह भी कहा कि शेष मामलों में बरी किए जाने के कारण असमान्य स्थिति पैदा हो गई है.

दोषसिद्धि को रखा बरकरार

सीजेआई गवई ने कहा कि इस मामले पर एक मिनट में सुनवाई की अनुमति दी जानी चाहिए. कोली ने दोषसिद्धि के खिलाफ क्यूरेटिव दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की लड़की रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में फरवरी 2011 में कोली की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था. सुरेंद्र कोहली रिम्पा हलदर हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. हालही में सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में कोहली को बरी कर दिया था.

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि जांच एजेंसी ने सबूत तक नहीं जुटाए. घटनास्थल के बगल में स्थित मकान में मानव अंग व्यापार का संगठित गिरोह पकड़ा जा सकता था, लेकिन उस ओर भी दिमाग नहीं लगाया गया. सुरेंद्र कोली के खुलासे के मुताबिक मृतक बच्चों की खोपड़ी, हड्डियों, कंकाल की बरामदगी को दर्ज कराने के लिए जो प्रक्रिया अपनाने की जरूरत थी, उसे पूरा नही किया गया.

हिरासत में क्रूर यातना

पिछली सुनवाई में सुरेंद्र कोली के वकील ने कहा कि 9 वरिष्ठ वकील पेश हुए, कोई भी बहस नहीं करना चाहता. सबूत के नाम पर 60 दिनों की हिरासत में क्रूर यातना के बाद प्राप्त धारा 164 सीआरपीसी का कबूलनामा और एक बरामदगी ही है. उन्होंने कहा था कि यह अंग व्यापार का मामला था, लेकिन सीबीआई ने इसे यौन उत्पीड़न, नरभक्षण का मामला बना दिया.

बता दें कि साल 2005 से 2006 में नोएडा में हुए निठारी केस में सीबीआई ने सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने के मामले में आरोपी बनाया था, जबकि मनिंदर सिंह पंढेर को मानव तस्करी का भी आरोपी बनाया गया था. दोनों आरोपियों ने अपनी फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

ये भी पढ़ें: जहरीली खांसी की दवा से बच्चों की हुई मौत, सुप्रीम कोर्ट पहुचा मामला, दायर जनहित याचिका में सीबीआई जांच की मांग

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital