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आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संसद नियम बनाती है पर कार्रवाई नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मेंशनिंग कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की पेशी से छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने निर्देशोंका पालन नहीं करने पर भी नाराजगी जताई है.

Edited by Vaibhav Gupta

Stray Dog ​​Case: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मेंशनिंग कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की पेशी से छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने निर्देशोंका पालन नहीं करने पर भी नाराजगी जताई है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वर्चुअली पेश होने की मांग को भी खारिज कर दिया है.

अदालत के आदेश का कोई सम्मान नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद हलफनामा दाखिल कर दिया गया है, इसपर कोर्ट ने कहा कि यह हलफनामा अंतिम समय में दाखिल किया गया होगा. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को कहा कि मुख्य सचिवों को प्रत्यक्ष के रूप से आने दीजिए. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत उन समस्याओं से निपटने में समय बर्बाद कर रही हैं.

कोर्ट ने आगे कहा कि इनका समाधान राज्य सरकार और नगर निगम को सालों पहले करना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि संसद नियम बनाती है, कोई कार्रवाई नहीं होती. कोर्ट ने कहा कि हम राज्यों से अनुपालन की अपेक्षा कर रहे थे, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया. अदालत के आदेश का कोई सम्मान नहीं है, इसलिए मुख्य सचिवों को कोर्ट में आने दीजिए, हम उनसे निपट लेंगे. उन्होंने कोर्ट में आकर बताना होगा कि उन्होंने हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया, उसके बाद उन्हें अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा.

चुनाव के कारण पेश होना संभव नहीं

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को तीन नवंबर को होने वाली पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव की ओर से पेश वकील ने कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव के कारण कोर्ट में पेश होना संभव नहीं है. इसपर कोर्ट ने कहा था कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. इससे पहले कोर्ट ने सभी राज्यो और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पूछा था कि कोर्ट के आदेश के बाद अभी तक क्यों नही जवाब दाखिल किया गया. कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेशों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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