सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए/यूएपीए मामले में अलग से कोर्ट के गठन के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट देश के 17 हाई कोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को विचार व्यक्त करने को कहा है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने के लिए विचार करने को कहा है.
यह पूरी तरह नीतिगत मामला है- CJI
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सूर्यकांत ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि क्या सरकार ऐसी अदालतों के गठन के लिए अलग से फंड देने के लिए सरकार तैयार है? इसपर भाटी ने सहमति जताते हुए कहा कि एनआईए कोर्ट में यूएपीए के मामले भी कवर होंगे. सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पूरी तरह नीतिगत मामला है और केंद्र सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड जारी करना चाहिए, लेकिन शर्त हो कि पैसा केवल अदालतों के निर्माण में ही इस्तेमाल हो. उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 60 फीसदी फंड दिए जाने के बावजूद ब्यूरोक्रेसी के चलते पैसा न्यायपालिका तक नही पहुंचता है.
सीजेआई ने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 18 विशेष अदालतें तो बनी हैं, लेकिन एक ही जज कई अदालतें संभाल रहे है.जिसके चलते मामलों में देरी हो रही हैं. कोर्ट ने राज्यों और हाई कोट्स को निर्देश दिया है कि दोनों अलग जजों की नियुक्ति करें. कोर्ट ने कहा कि इन अदालतों के लिए जरूरी स्टाफ की पहचान करने को कहा है. कोर्ट ने राज्यों से चार सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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