Supreme Court ने पश्चिम बंगाल की CM Mamata Banerjee के खिलाफ दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश पर कड़ा रुख अख्तियार किया है.
सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चन्द्रन की पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अदालत के मंच का राजनीतिकरण करने की कोशिश न कि जाए, और ऐसे विवादों को राजनीतिक अखाड़ा न बनाया जाए.
याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शिक्षक भर्ती घोटाले पर SC के फैसले के बाद सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक बयान देकर अदालत की गरिमा को ठेस पहुचाया है.
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट से आग्रह किया कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल से सहमति मांगी है. इसलिए मामले की सुनवाई कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाए.
इसपर टिप्पणी करते हुए सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि क्या आपको इतना यकीन है कि अनुमति मिल ही जाएगी? अदालत के मंच को राजनीति के लिए इस्तेमाल न करें. अगर लड़ाई राजनीतिक है, तो उसे राजनीतिक मैदान में लड़ें, कोर्ट में नहीं. इसके साथ ही कोर्ट ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया है.
कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पर जताई गंभीर चिंता
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा की गई लगभग 25000 नियुक्तियों को रद्द कर दिया था.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पश्चिम बंगाल के राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में 25753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया था.
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि जब राज्य सरकार को सिलेक्शन में गड़बड़ी का पता चल चुका था, तो शिक्षकों की अतिरिक्त पद पर नियुक्ति क्यों कि गई.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस घोटाले में गड़बड़ियों का संकेत दिया था और कहा था कि यह स्पष्ट है कि दागी उम्मीदवारों को बेदाग उम्मीदवारों से अलग करना संभव नहीं है.
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में जम्मू कश्मीर के कॉन्स्टेबल को दी गई यातना के मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

