Supreme Court ने हिरासत में जम्मू कश्मीर के कॉन्स्टेबल को दी गई यातना के मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा स्थित संयुक्त पूछताछ केंद्र (जेआईसी) में पुलिस कॉन्स्टेबल को दी गई अवमानवीय यातना की जांच का आदेश दिया है.
साथ ही कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के जिम्मेदार अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी का निर्देश दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता पुलिस कॉन्स्टेबल को उसकी मौलिक और मनाधिकारों का गंभीर उल्लंघन सहना पड़ा.
कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार को पीड़ित खुर्शीद अहमद चौहान को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि केवल संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच ही नहीं, बल्कि पूरे संयुक्त पूछताछ केंद्र में व्याप्त संस्थागत खामियों की भी पड़ताल की जानी चाहिए.
दोषी अधिकारियों को 1 महीने में करें गिरफ्तार-SC
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि जम्मू कश्मीर पुलिस के दोषी अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार किया जाए. एफआईआर की तारीख से तीन महीने के भीतर सीबीआई अपनी जांच पूरी करें. जेआईसी कुपवाड़ा में मौजूद ढांचागत कर्मियों और दंडमुक्ति मि भी जांच की जाए.
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि हिरासत में यातना जैसे संवेदनशील विषय पर संवैधानिक सुरक्षा उपायों को सुदृढ करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. कोर्ट ने स्पष्ट किया गया कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्यायलय मूकदर्शक नहीं बना रह सकता.
बता दें कि पीड़ित पुलिस कांस्टेबल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसे 20 से 26 फरवरी 2023 तक जेआईसी कुपवाड़ा में छह दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखकर शारीरिक और मानसिक यातना दी गई. इतना ही नही पीड़ित के मुताबिक गुप्तांगों को क्षत-विक्षत किया गया, जिसके चलते उसने आत्महत्या की कोशिश की.
-भारत एक्सप्रेस
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