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रोहिंग्या शरणार्थियों के निर्वासन और उनके जीवनयापन से संबंधित याचिका पर SC 8 मई को करेगा अंतिम सुनवाई

रोहिंग्या मानवाधिकार पहल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा था कि इस आदेश से 500 रोहिंग्या छात्रों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश का रास्ता साफ हो जाएगा.

Supreme Court
Edited by Akansha

रोहिंग्या शरणार्थियों के निर्वासन और उनके जीवनयापन की स्थितियों से संबंधित दायर जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 8 मई को सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के लिए 8 मई की तारीख तय किया है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी बच्चों को बिना भेदभाव के शिक्षा मिलनी चाहिए. कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा और अस्पतालों में समुचित इलाज मुहैया कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई थी.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था हलफनामा

वही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि विदेशी नागरिकों को पूरी तरह से नहीं अपनाया जा सकता और एक विदेशी नागरिक केवल अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त कर सकता है, लेकिन वह भारत में निवास या बसने के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता है. कोर्ट ने कहा था कि हम चाहते है कि बच्चे पहले सरकारी स्कूलों से संपर्क करें. अगर उन्हें प्रवेश नहीं मिलता है, तो वे हाई कोर्ट जा सकते हैं.

रोहिंग्या छात्रों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेशा का रास्ता साफ

रोहिंग्या मानवाधिकार पहल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा था कि इस आदेश से 500 रोहिंग्या छात्रों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश का रास्ता साफ हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि मैं 2018 से इस मुद्दे को लेकर लड़ाई लड़ रहा हूं, अगर कोर्ट एक सीधा आदेश दे दे, तो 500 बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिल जाएगा.

कोर्ट ने याचिका को किया खारिज

गोंजाल्विस ने यह भी कहा था कि रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड न होने की वजह से स्कूलों में प्रवेश से वंचित किया जा रहा है. वे UNHCR कार्ड धारक शरणार्थी है और उनके पास आधार कार्ड नहीं हो सकता, लेकिन आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. इससे पहले दिल्लीहाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यह मामला देश की सुरक्षा और नागरिकता के प्रश्न से जुड़ा हुआ है.

NGO ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 29 जनवरी 2025 को इस मामले की सुनवाई करते हुए इस संगठन से उन बच्चों की जानकारी मांगी थी, जिन्हें दाखिला देने से इनकार किया गया है.

-भारत एक्सप्रेस 


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