सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश में कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर याचिका पर जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ जल्द सुनवाई को तैयार हो गई है. लेकिन कोर्ट ने आज घोषित होने वाले नतीजों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट दायर याचिका पर 12 जून को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सिंघवी ने आरपी एक्ट (RP Act) के सेक्शन 33A का हवाला दिया. वहीं रिटर्निंग अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने जल्द सुनवाई की मांग पर आपत्ति जताई है.
सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने न तो संज्ञान लिया है और न ही आरोप तय किए हैं. जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा कि कानून स्पष्ट है और अशोक कुमार मामले में बहुत स्पष्टता है. मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि रिटर्निंग अधिकारी के आदेश पूरी तरह नियम के खिलाफ हैं, जिन्हें जल्दबाजी में लिया गया और अवैध बताया गया है. साथ ही रिटर्निंग अधिकारी के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है.
बीजेपी की आपत्ति पर रिटर्निंग अधिकारी ने रद्द किया था नामांकन
मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा चुनाव होना है. रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्ति स्वीकार करते हुए नामांकन रद्द कर दिया था. बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी थी. नामांकन रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन पत्र के फॉर्म 26 में शपथ पत्र में मुकदमे का उल्लेख नहीं किया था. कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध बताया है और आरोप लगाया है कि बीजेपी ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है.
नामांकन के सेट-बी को लेकर विवाद
रिटर्निंग अधिकारी के फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा, रणदीप सुरजेवाला, भूपेश बघेल और दीपा दासमुंशी के एक प्रतिनिधिमंडल ने नटराजन के साथ चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और मांग की कि इस फैसले को पलटा जाए. नामांकन पत्र के पार्ट-ए में नटराजन ने अपनी संपत्ति घोषित की है लेकिन सेट-बी में रिक्त छोड़ दी. उनके खिलाफ मुकदमा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट हैदराबाद में लंबित है.
लोकतंत्र के साथ खिलवाड़: मीनाक्षी नटराजन
वहीं मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है. हमें अभी भी संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और वकील अजय गुप्ता का कहना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 स्वयं कहती है कि यह मामला आपराधिक प्रकरण की श्रेणी में ही नहीं आता है. कांग्रेस की आशंका केवल राजनीतिक बयानबाजी पर आधारित नहीं थी, बल्कि उसके पीछे छह साल पुराना एक बड़ा राजनीतिक अनुभव भी है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





