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फांसी है दर्दनाक! मौत की सजा के लिए क्या बदलेगा दशकों पुराना तरीका? सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बहस

मौत की सजा के तौर-तरीकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम बहस सामने आई है. फांसी की जगह घातक इंजेक्शन जैसे वैकल्पिक तरीकों की मांग वाली याचिका पर अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

Supreme Court Overruling Gujarat High Court Order Refused Minor Testify Again In Suicide Case

मौत की सजा काट रहे कैदियों के लिए फांसी की जगह घातक इंजेक्शन जैसे तरीकों को अपनाने की.मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह याचिका वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील और केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल से तीन सप्ताह में लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की है. जो वैकल्पिक तरीको पर अध्ययन कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फांसी को सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जा रहा है, इसलिए इसे बदलने के पक्ष में नहीं है. कोर्ट ने केंद्र के इस रुख पर नाराजगी जताई और कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन सरकार इसमें तैयार नहीं दिख रही. कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान दयालु और जीवंत है. जिससे सम्मानजनक मौत का अधिकार भी शामिल होना चाहिए.

दायर याचिका में मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग की गई है. याचिकाकर्ता की दलील है कि फांसी देना मौत की सजा को अंजाम देने का एक दर्दनाक तरीका है. याचिकाकर्ता की मांग है कि फांसी की जगह घातक इंजेक्शन, फायरिंग स्क्वाड, बिजली की कुर्सी या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाया जाए. याचिकाकर्ता की दलील है कि इन तरीकों से मौत कुछ ही मिनटों में हो जाती है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है और यह क्रूर और दर्दनाक हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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