मौत की सजा काट रहे कैदियों के लिए फांसी की जगह घातक इंजेक्शन जैसे तरीकों को अपनाने की.मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह याचिका वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील और केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल से तीन सप्ताह में लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की है. जो वैकल्पिक तरीको पर अध्ययन कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फांसी को सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जा रहा है, इसलिए इसे बदलने के पक्ष में नहीं है. कोर्ट ने केंद्र के इस रुख पर नाराजगी जताई और कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन सरकार इसमें तैयार नहीं दिख रही. कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान दयालु और जीवंत है. जिससे सम्मानजनक मौत का अधिकार भी शामिल होना चाहिए.
दायर याचिका में मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग की गई है. याचिकाकर्ता की दलील है कि फांसी देना मौत की सजा को अंजाम देने का एक दर्दनाक तरीका है. याचिकाकर्ता की मांग है कि फांसी की जगह घातक इंजेक्शन, फायरिंग स्क्वाड, बिजली की कुर्सी या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाया जाए. याचिकाकर्ता की दलील है कि इन तरीकों से मौत कुछ ही मिनटों में हो जाती है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है, जबकि फांसी में काफी समय लग सकता है और यह क्रूर और दर्दनाक हो सकती है.
यह भी पढ़ें: नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत के मामले में एनजीटी ने लिया स्वतः संज्ञान
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

