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53 साल के हो चुके व्यक्ति ने 37 साल पहले किया था रेप, सुप्रीम कोर्ट ने उसे नाबालिग किया घोषित

सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर के 1988 के दुष्कर्म मामले में आरोपी को 37 साल बाद नाबालिग माना है. कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत सुनवाई का आदेश देते हुए निचली अदालत की दोषसिद्धि को बरकरार रखा.

Supreme Court on Shivsena Symbol Row
Edited by Akansha

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने एक नाबालिग के बलात्कार मामले में एक आरोपी को 37 साल बाद नाबालिग घोषित किया है. यह मामला राजस्थान के अजमेर का है. साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि को बरकरार रखने का आदेश दिया है. कोर्ट ने शख्स को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश होने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को किया रद्द (Supreme Court)

सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत और राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने पहली बार दावा किया गया वह अपराध के समय नाबालिग था. कोर्ट ने कहा कि उसके इस दावे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर के जिला और सत्र न्यायाधीश को उसके दावों की जांच करने का निर्देश दिया.

अपराध के समय नाबालिग था शख्स

जांच और दस्तावेजों के आधार पर न्यायाधीश ने द्वारा दिए गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के समय आरोपी की उम्र 16 साल 2 महीने 3 दिन थी. उसकी जन्मतिथि 14 सितंबर 1972 पाई गई. अपराध के समय शख्स नाबालिग था, अब वह 53 साल का है. कानून के तहत वह अधिकतम तीन साल तक सुधार गृह में रह सकता है. यह अपराध 17 नवंबर 1988 को हुआ था.

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सरकार ने आरोपी की ओर से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की

हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने आरोपी की ओर से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की थी. सरकार ने कहा कि इस समय उसके दावे पर विचार नही किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त के आलोक में, किशोर न्याय अधिनियम 2000 में निहित प्रावधान लागू होंगे.

डेढ़ साल तक जेल में बिता चुका है आरोपी

बता दें कि किशनगंज के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को धारा 376 (दुष्कर्म)के तहत दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. जिसे जुलाई 2024 में राजस्थान हाई कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा था. आरोपी डेढ़ साल तक जेल में बिता चुका है.

-भारत एक्सप्रेस 



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