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‘राजनीतिक लड़ाई बाहर लड़ें, कोर्ट को अखाड़ा न बनाएं’; करूर हादसे पर आरएस भारती पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले में डीएमके (DMK) की याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई बाहर लड़ें, अदालत को मंच न बनाएं.

Supreme Court

तमिलनाडु के करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ के मामले में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की ओर से दायर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सभी पक्षों की लंबी जिरह सुनने के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया है. न्यायाधीशों द्वारा कड़ा रुख अख्तियार करने और याचिका वापस लेने के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली.

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने पीड़ितों के परिजनों से मुख्यमंत्री की मुलाकात पर सवाल उठाए थे. इस पर अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि कोर्ट भला मुख्यमंत्री के दौरों को कैसे नियंत्रित कर सकती है? भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात करने को गवाहों को प्रभावित करना कैसे माना जा सकता है? इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा इस मामले के गवाहों को प्रभावित करने के डीएमके के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने याचिकाकर्ता को नसीहत देते हुए कहा:

“फ्रीडम ऑफ स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का जवाब और ज्यादा स्पीच ही होता है. किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को इस मामले में पक्षकार कैसे बनाया जा सकता है? हादसे में 41 लोगों की मौत हुई है, क्या यह सब सोचकर याचिका दायर की गई है? इसका नतीजा क्या होगा? जरा रुकिए और सोचिए. अगर किसी भाषण से अदालत की अवमानना हुई है, तो आपने खुद कहा था कि आप उसके लिए केस करेंगे. इसमें आरोपी कुछ मंत्री हैं, मुख्यमंत्री नहीं. आज आप इस अदालत को राजनीतिक मंच बना रहे हैं, बजाए इसके कि आप अपनी राजनीतिक लड़ाई बाहर लड़ें.”

बयानबाजी पर रोक लगाने की थी मांग

यह अर्जी डीएमके (DMK) के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आर. एस. भारती की ओर से दायर की गई थी. दायर अर्जी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, तमिलनाडु के मंत्रियों और अन्य आरोपियों को सीबीआई (CBI) की चल रही जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने की मांग की गई थी. साथ ही जांच के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनके संपर्क और बातचीत को नियंत्रित करने की भी गुहार लगाई गई थी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इस संवेदनशील मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी. वर्तमान में इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है.

मंत्री जाधव के बयान पर था ऐतराज

याचिकाकर्ता आर. एस. भारती ने अपनी याचिका में कहा था कि मुख्यमंत्री विजय, मंत्री जाधव अर्जुन और अन्य आरोपी सीबीआई जांच पूरी होने तक कोई सार्वजनिक बयान न दें. याचिका में आरोप लगाया गया था कि 2 जुलाई को मंत्री जाधव द्वारा दिया गया बयान सीधे तौर पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश है. मंत्री जाधव ने अपने बयान में कहा था कि करूर घटना को लेकर पुराना हिसाब बराबर करना है और उन्होंने पूर्ववर्ती डीएमके सरकार पर लोगों की मौत का सीधा आरोप मढ़ा था.

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दायर याचिका में यह भी दलील दी गई थी कि जिन लोगों के खिलाफ पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें से कई लोग अब 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी तमिलनाडु कैबिनेट के सक्रिय सदस्य हैं. याचिका में बताया गया कि सीबीआई इस मामले में मुख्यमंत्री विजय और टीवीके (TVK) के कई बड़े नेताओं से पूछताछ कर चुकी है और जांच अभी भी जारी है.

एक्टर विजय के रोड शो के दौरान हुई थी भगदड़

बता दें कि 27 सितंबर को करूर में हुई इस भीषण भगदड़ में कुल 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. इसके अलावा 142 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आरोप है कि एक्टर और नेता विजय के रोड शो के दौरान टीवीके (तमिलगा वेत्री कज़गम) के समर्थकों ने भारी तोड़फोड़ की थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था. पुलिस ने इस घटना में सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में पार्टी सदस्यों के खिलाफ कुल 9 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, जिनमें टीवीके के जिला सचिव भी नामजद हैं.



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