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बाइबिल अपमान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, मजिस्ट्रेट के पास जाने की सलाह

Bible Insult Case: सुप्रीम कोर्ट ने बाइबिल के अपमान और ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोपों वाली याचिका खारिज की. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराने और उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी.

supreme court

Bible Insult Case: सुप्रीम कोर्ट ने बाइबिल के अपमान करने पर शिवशक्ति फाउंडेशन और अन्य खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. दायर याचिका में ईसाई समुदाय के प्रति कथित घृणा फैलाने और बाइबिल का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने याचिकाकर्ता को.मजिस्ट्रेट के.समक्ष जाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता मजिस्ट्रेट की अदालत में अपनी शिकायत दर्ज कराए और वहां.से उन्हें राहत नही मिलती है तो हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट पहले ही उनकी याचिका को अस्पष्ट और सामान्य बताते हुए खारिज कर चुका है, तो सुप्रीम कोर्ट ने पुनः कहा कि यदि कोई अपराध बनता है, तो उसके लिए विधिसम्मत तरीके से निचली अदालत में कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

याचिकाकर्ता की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया

यह याचिका अशोक बेबी चेगुड़ी और अन्य की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश में शिवशक्ति फाउंडेशन, हिंदू जनशक्ति और एक व्यक्ति राधा मनोहर दास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में.ईसाई समुदाय और उनके धार्मिक प्रतीकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थी.

बता दें कि इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल अवैध है, बल्कि वे धार्मिक विद्वेष फैला रही हैं. इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया था. हाई कोर्ट ने मार्च में याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था और कहा था कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और सामान्य है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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