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चुनावी हलफनापे में गलत जानकारी पर वोटर करा सकेगा क्रिमिनल केस: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने वाले नेताओं के खिलाफ कोई भी आम नागरिक या मतदाता सीधे मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करा सकता है.

Supreme Court False Election Affidavit Any Voter Can File Criminal Case
Edited by Vaibhav Gupta

चुनावी राजनीति में उम्मीदवारों द्वारा झूठे वादे और गलत हलफनामे जमा करने की बढ़ती शिकायतों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. देश की शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर कोई नेता या उम्मीदवार चुनाव लड़ते समय अपने हलफनामे में कोई झूठ बोलता है या जरूरी जानकारी छिपाता है, तो उसके खिलाफ कोई भी आम नागरिक या मतदाता सीधे मजिस्ट्रेट के पास जाकर आपराधिक केस दर्ज करा सकता है.

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 125A के तहत इस तरह की शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी सरकारी अधिकारी या चुनाव आयोग की औपचारिक लिखित मंजूरी होना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है.

शीर्ष अदालत ने पलटा फैसला

शीर्ष अदालत का यह ऐतिहासिक रुख कर्नाटक हाई कोर्ट के उस पुराने फैसले को रद्द करते हुए आया है, जिसमें कहा गया था कि हलफनामे में गड़बड़ी के मामलों में सिर्फ चुनाव आयोग या संबंधित सरकारी अधिकारी ही केस दर्ज करा सकते हैं, आम जनता नहीं.

दरअसल, यह मामला कर्नाटक की बीदर सीट से निर्वाचित बीजेपी विधायक डॉ. शैलेंद्र बेलडाले के खिलाफ दायर एक याचिका से जुड़ा था. शिकायतकर्ता राजकुमार मडकी ने आरोप लगाया था कि विधायक ने 2023 के विधानसभा चुनाव में अपने आवासीय पते की गलत जानकारी दी थी. निचली अदालत में दर्ज इस शिकायत को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सवाल को साफ करते हुए साफ कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125A पर सीआरपीसी की धारा 195(1)(a) की पाबंदियां लागू नहीं होतीं.

कानून की व्याख्या सिर्फ अदालत का अधिकार

सुनवाई के दौरान विधायक पक्ष ने चुनाव आयोग के 2020 के एक प्रेस नोट का हवाला देकर अपनी दलील दी थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का कोई भी दिशा-निर्देश या प्रेस नोट यह तय नहीं कर सकता कि कानून के तहत शिकायत कौन दर्ज करा सकता है. देश के कानूनों की सही व्याख्या करना सिर्फ और सिर्फ अदालतों का काम है. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले से अब राजनेताओं में फर्जी हलफनामे भरने को लेकर डर पैदा होना तय माना जा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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