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बैंक फ्रॉड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तार एमटेक के प्रमोटर को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

2700 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार एमटेक के प्रमोटर अरविंद धाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अरविंद धाम को शीर्ष अदालत ने कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर दी है.

Supreme Court granted bail to Amtek promoter
Edited by Vaibhav Gupta

2700 करोड़ के बैंक फ्रॉड के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तार एमटेक के प्रमोटर अरविंद धाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. अरविंद धाम को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया है. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया है.

बैंक की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

अरविंद धाम ने दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. ईडी के मुताबिक कंपनी और उसके डायरेक्टर अरविंद धाम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है. हाई कोर्ट ने मामले की जांच के लिए ईडी को अनुमति दी थी.

सीबीआई ने IDBI बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की लिखित शिकायत के बाद दर्ज किया है. ईडी गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने M/s ACIL लिमिटेड और ग्रुप की अन्य कम्पनियों के मामले में पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत पिछले साल 9 जुलाई को अरविंद धाम को गिरफ्तार किया था.

5000 करोड़ से अधिक के शेयर और डिबेंचर जब्त

बता दें कि सितंबर में ईडी ने धन शोधन निरोधक कानून के तहत फार्म हाउस, राज्यों में सैकड़ो एकड़ कृषि और औद्योगिक भूमि तथा 5000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर और डिबेंचर जब्त किया था. इसमें एमटेक के अन्य कम्पनियों में एआरजी लिमिटेड, एसीआईअल लिमिटेड, मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड और कैस्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड शामिल है.

ईडी जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने अपनी समूह कंपनियों को दिवालियापन में ले जाने के लिए वित्तीय विवरणों में हेराफेरी की और नकली संपत्तियां बनाई थी. इन कंपनियों के समाधान के दौरान बैंकों को 80 % से अधिक हेयरकट लेना पड़ा था.

महाराष्ट्र में 35 स्थानों पर छापेमारी

20 जून को ईडी ने 20000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले में एमटेक समूह के खिलाफ दिल्ली, एनसीआर और महाराष्ट्र में 35 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें सूचिबद्ध कंपनियों की संख्या 1000 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिन्हें अंततः एनसीएलटी की कार्यवाही में मामूली कीमत पर ले लिया गया था. इससे बैंकों के संघ को मामूली वसूली हुई. ईडी के मुताबिक कथित धोखाधड़ी से सरकारी खजाने को लगभग 10-15 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ.

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-भारत एक्सप्रेस



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