Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

सुप्रीम कोर्ट से पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर को बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेड़कर को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत. कोर्ट ने 25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी और जांच में सहयोग का आदेश दिया.

Pooja Khedkar

पूजा खेड़कर (फाइल फोटो)

पूर्व ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पूजा खेड़कर को अग्रिम जमानत दे दिया है. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने पूजा खेड़कर को 25 हजार रुपये की निजी मुचलके पर जमानत देते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग करेंगी. सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करेगी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्होंने कौन सा गंभीर अपराध किया है? वह मादक पदार्थ माफिया या आतंकवादी नही है. उन्होंने हत्या नही की है. वह एनडीपीएस अपराधी नही है. आपके पास कोई प्रणाली या सॉफ्टवेयर होना चाहिए. आप जांच पूरी करे. उन्होंने सब कुछ खो दिया है और उन्हें कही नौकरी नही मिलेगी.

हाई कोर्ट को पहले ही जमानत देनी चाहिए थी– सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट को जमानत देनी चाहिए थी. वही दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने खेड़कर के अग्रिम जमानत का विरोध किया और कहा कि वह जांच में सहयोग नही कर रही है. उनके ऊपर लगे आरोप गंभीर है.

पिछली सुनवाई में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि गलत मेडिकल सर्टिफिकेट दिया गया. परीक्षा में नाम बदला गया. खेडकर पर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ओबीसी और दिव्यांग कोटा का गलत लाभ उठाने और धोखाधड़ी करने का आरोप है.

ओबीसी और दिव्यांग कोटा का दुरुपयोग करने का आरोप

दिल्ली पुलिस ने पूजा खेड़कर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी की है, साथ ही उन पर अवैध रूप से ओबीसी और दिव्यांगता कोटा का गलत तरीके से फायदा उठाने का आरोप लगाया है. अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान खेड़कर की ओर से पेश वकील बीना माधवन ने कहा था कि वह जांच में सहयोग करने को तैयार है, साथ ही यह भी दावा किया कि उन्हें हिरासत में लेने की आवश्यकता नही हैं क्योंकि सभी सबूत दस्तावेज प्रकृति के है.

इसके अलावा खेड़कर की ओर से यह भी कहा गया था कि हमने कभी एफआईआर को रद्द करने की मांग नही की है. उनके वकील ने कहा था कि अभी तक के जांच में यह बात साबित नही हुई है कि मैने कोई धोखाधड़ी की है. उसमें ऑथरिटी की ही कमियां सामने आई है. जबकि दिल्ली पुलिस पुलिस और युपीएससी की ओर से जमानत का विरोध किया गया.

UPSC का आरोप–‘झूठे हलफनामे और न्याय प्रणाली में हेरफेर’

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि इस अपराध में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए पूजा खेड़कर को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि इस केस में अभी तक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच नही की गई है. दिल्ली पुलिस के वकील ने परीक्षा संबंधी अलग-अलग प्रयासों के लिए खेड़कर के नाम मे कथित बदलाव और उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र में विसंगतियों पर भी चिंता जताई थी.

यूपीएससी ने आरोप लगाया था कि पूजा खेड़कर ने न्यायिक प्रणाली में हेरफेर करने का प्रयास किया और झूठा हलफनामा दायर करके झूठी गवाही दी है. यूपीएससी ने कहा था कि स्पष्ट रूप से ऐसे झूठे बयान देने के पीछे की मंशा स्वाभाविक रूप से झूठे बयान के आधार पर अनुकूल आदेश प्राप्त करने की कोशिश लगती है.

ये भी पढ़ें: श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में संशोधन की मांग, याचिका दाखिल

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital