शादी. कॉम के संस्थापक अनुपम मित्तल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने अनुपम मित्तल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर 8 सप्ताह तक के लिए रोक लगा दिया है. साथ ही कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है. शादी. कॉम के जरिए हुई धोखाधड़ी के मामले में एक महिला के आरोप के बाद अनुपम मित्तल के खिलाफ शिकायत दर्ज किया गया है.
जस्टिस पी. के मिश्रा और जस्टिस एन. वी अंजारिया की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने नए दायर याचिका पर नए सिरे से विचार करने को कहा है. कोर्ट ने यह सवाल उठाया है कि हाई कोर्ट में क्वैशिंग याचिका को प्रभावी ढंग से क्यों नही उठाया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में मेरिट के आधार पर विचार नही किया. कोर्ट ने मित्तल को अंतरिम राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी है. कोर्ट ने कहा कि इससे पहले भी मित्तल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा रखा है. मामले की सुनवाई के दौरान मित्तल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आत्माराम नाडकर्णी ने दलील देते हुए कहा कि शादी. कॉम केवल एक मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म है.
अनुपम मित्तल की सुप्रीम कोर्ट में दलील
उपभोक्ताओं के बीच आगे होने वाली बातचीत, खासकर जव संवाद व्हाट्सएप जैसे निजी प्लेटफॉर्म पर चला जाता है, उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी जांच में सहयोग कर रही है और अनुपम मित्तल को व्यक्तिगत रूप से आरोपी बनाने का कोई ठोस आधार नही है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि हाई कोर्ट में क्वैशिंग याचिका को प्रभावी ढंग से क्यों नहीं उठाया गया. तेलंगाना हाई कोर्ट ने मित्तल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था. हैदराबाद की रहने वाली एक महिला ने मित्तल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शादी. कॉम पर मिले एक व्यक्ति ने फर्जी प्रोफाइल के जरिये 11 लाख रुपए की धोखाधडी की है. महिला की दलील है कि प्लेटफॉर्म यूजर के विवरण को सत्यापित करने में विफल रहा है. जिसके कारण उसको आर्थिक नुकसान हुआ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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