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पर्यावरण और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तुलना सीता माता से करने पर केंद्र की आपत्ति, एसजी बोले- ‘युवाओं को गृहयुद्ध की ओर धकेल रहे हैं’

सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई जारी है. केंद्र ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए कड़ा विरोध किया, जबकि याचिकाकर्ता ने हिरासत प्रक्रिया में देरी और कानूनी खामियों का हवाला दिया.

पर्यावरण और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान कल भी सुनवाई जारी रहेगी. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि क्या वह लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते हैं? जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

एसजी मेहता ने कहा कि सोनम वांगचुक के भाषण साधारण विरोध नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने आरोप लगाया कि क्या युवाओं को भड़काने और आत्मदाह के लिए उकसाने का प्रयास कर रहे है. उन्होंने कहा कि गांधी का नाम केवल एक आवरण की तरह इस्तेमाल किया गया. भाषणों में जनमत संग्रह और अलगाववादी संकेत दिए गए.

एसजी मेहता ने  वांगचुक द्वारा दिए गए उदाहरण पर आपत्ति जताई, जिसमे सोनम वांगचुक की तुलना “सीता माता से करते हुए कहा था कि राम ने सीता को रावण से बचाया, लेकिन फिर बाजार में बेच दिया.”

एसजी मेहता ने कहा कि इस तरह के पवित्र प्रतीकों का प्रयोग भड़काऊ भाषणों के लिए किया जा रहा है. एसजी मेहता ने वांगचुक के भाषण के अंश को भी पढ़ कर सुनाया. उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश और श्री लंका जैसी क्रांति का हवाला दिया. एसजी मेहता के अनुसार यह युवाओं को गृहयुद्ध और खून खराबे की ओर धकेलने का सीधा निमंत्रण है. मेहता ने कहा कि लद्दाख पाकिस्तान और चीन से घिरा संवेदनशील इलाका है.

सिब्बल ने कोर्ट में उठाया सवाल

एसजी मेहता ने कहा कि अगर यह एनएसए का मामला नही है तो कोई मामला नही हो सकता है. एसजी ने याचिका का कड़ा विरोध किया है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा. था कि सोनम वांगचुक को हिरासत में रखने का आधार 28 दिन की देरी से उपलब्ध कराया गया है, जो वैधानिक समय सीमा का उल्लंघन है. सिब्बल ने एक बार फिर कहा था कि 29 सितंबर को सोनम वांगचुक को हिरासत आदेश और हिरासत के अपूर्ण आधार पर सौंपे गए थे. उन्होंने कहा था कि घटना से संबंधित चार वीडियो उपलब्ध नही कराया गया है.

कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की ओर से दायर  बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है. सोनम वांगचुक की पत्नी ने एनएसए के तहत की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है. 26 सितंबर को उन्हें एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उनको राजस्थान के जोधपुर जेल भेज दिया गया था. फिलहाल वो जोधपुर जेल में ही बंद है.

गीतांजलि की राष्ट्रपति से अपील

इससे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर अपने पति की बिना शर्त रिहाई की मांग की हैं. उन्होंने अपने अपील में कहा है कि राष्ट्रपति एक आदिवासी होने के चलते लद्दाख के लोगों की भावनाओं को समझें. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि चार साल से लोगों के हितों को लेकर किए जा रहे काम की जासूसी कराई जा रही हैं. गीतांजलि से दायर याचिका में कहा कि उनके पति की गिरफ्तारी गैर कानूनी हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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