उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों द्वारा लाए गए गैरकानूनी धर्म परिवर्तन कानून की वैधता की चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट दिसंबर में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशनिंग कर जल्द सुनवाई की मांग की गई. कोर्ट ने कहा कि जल्द सुनवाई संभव नही है. इसे दिसंबर में सूचीबद्ध किया जाएगा.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि नए कानून का लगातार गलत इस्तेमाल हो रहा है. लिहाजा जल्द अगले हफ्ते सुनवाई कर ली जाए. कोर्ट ने कहा कि यह संभव नही हैं. कोर्ट राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया है. उसके दो सप्ताह बाद याचिककर्ताओ द्वारा जवाबी जवाब दाखिल किया जाएगा.
धर्म परिवर्तन पर रोक या अधिकारों पर अंकुश?
6 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरधार्मिक शादियों की वजह से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों द्वारा लाए गए विवादास्पद कानून की जांच पर सहमति जताई थी. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. विशाल तिवारी की ओर से दायर याचिका में उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्मांतरण कानून 2020 और उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता कानून 2018 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है.
दायर याचिका में कहा गया है कि ये कानून संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. इन कानूनों से पसंद का जीवनसाथी चुनने के अधिकार का भी हनन होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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