लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा हैं. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून को चुनौती दी गई है.
33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात
यह याचिका मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता डॉक्टर जया ठाकुर की ओर से दायर की गई हैं. इससे पहले कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. अदालत ने कहा था कि जया ठाकुर और अन्य ने उस विधेयक को चुनौती दी है जो अब कानून बन गया है.
जिसके बाद जया ठाकुर ने नए सिरे से याचिका दायर कर कानून को चुनौती दी है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक 2023 में संसद के एक विशेष सत्र में पारित किया गया. यह लोकसभा और दिल्ली सहित सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है.
परिसीमन के बाद होगा प्रभावी
सूत्रों के मुताबिक जनगणना की घोषणा हो चुकी है और उसके बाद अन्य कदम उठाया जाएगा. महिला आरक्षण विधेयक परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है. हमारा लक्ष्य में इसे लागू करना है. संविधान (128 वां संशोधन) विधेयक 2023 के अनुसार सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण अधिनियम के बाद आयोजित पहली जनगणना के आंकड़े के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रभावी होगा.
SC/ST के लिए अलग से आरक्षण नहीं
कानून के मुताबिक इससे राज्य विधानसभाओं, केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. इसी 33 फीसदी में से एक तिहाई सीटे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए होगीं. यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं मिलेगा, बल्कि आरक्षण के भीतर भी आरक्षण होगा. विधान परिषद और राज्यसभा में ये आरक्षण लागू नहीं होगा. अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबोसी) को भी आरक्षण नहीं मिलेगा.
ये भी पढ़ें: लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट में चार्ज पर 4 दिसंबर को सुनाएगा फैसला
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

