Bharat Express DD Free Dish

खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जनवरी में करेगा सुनवाई

खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने के राज्यों को अधिकार देने से जुड़े मामले में केंद्र सरकार की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में सुनवाई कर सकती है. सीजेआई सूर्यकांत ने क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई का भरोसा दिया.

Justice Suryakant, Chief Justice of India, Supreme Court, Chief Justice Appointment

खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने के राज्यों को दिया गया अधिकार को लेकर केंद्र सरकार की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है. सीजेआई सूर्यकांत ने क्यूरेटिव याचिका पर जनवरी 2026 में सुनवाई का भरोसा दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मेरा सुझाव है कि पहले क्यूरेटिव याचिका पर सुझाव हो. उन्होंने कहा कि राज्यों के अलग-अलग कानूनों पर भी फैसला होना है.

वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जुलाई 2024 से 80 नियमित मामले लंबित हैं. 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने के राज्यों को दिया गया अधिकार 1 अप्रैल 2005 से लागू होगा. संविधान पीठ के इस फैसले से बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिसा को फायदा होगा. संविधान पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि राज्यों द्वारा टैक्स की मांग के भुगतान का समय 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और इसका भुगतान 12 वर्षों की अवधि में किस्तों में किया जाएगा. 25 जुलाई 2024 से पहले की किसी भी तरह की टैक्स की मांग पर राज्य  कोई ब्याज या जुर्माना की मांग नहीं कर पाएंगे.

रॉयल्टी पर नहीं लगेगा टैक्स

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा लिखित और जस्टिस हृषिकेश रॉय, ए एस ओका, जे बी पारदीवाला, मनोज मिश्रा, उज्ज्वल भुयान, एस सी शर्मा और ए जी मसीह की पीठ ने यह फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने 25 जुलाई को दिए अपने फैसले में कहा था कि रॉयल्टी को कर नही माना जा सकता है. इस फैसले से खनिज व खदान सम्पन्न राज्य बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिसा को फायदा होगा.

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगर 25 जुलाई का फैसला पिछली तारीख से लागू होता है, तो कम्पनियां इसका खर्च नागरिकों पर डाल सकती है. उन्होंने खनकी 1989 का फैसला 35 साल तक के लिए लागू था और 25 जुलाई के फैसला का आर्थिक असर हर राज्य में अलग-अलग होगा.

राज्यों को मिलेगा खनिज कर लगाने का अधिकार

बता दें कि 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने कहा था कि राज्यों के पास खनिजों पर कर लगाने का अधिकार है. जबकि 1989 के फैसले में यह अधिकार केंद्र सरकार को दिया गया था. कुछ राज्यों ने केंद्र से कर और रॉयल्टी की वापसी की मांग की है. लेकिन केंद्र सरकार का कहना था कि अगर यह मांग मान ली जाती है, तो इससे नागरिकों पर असर पड़ेगा और सरकारी कम्पनियों को 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

गौरतलब है कि 2011 में मामले को 89 जजों की बेंच के पास भेज दिया गया था. तीन जजों बाकी बेंच ने 9 जजों को भेजे जाने के लिए 11 सवाल तैयार किये थे.

ये भी पढ़ें: ‘ज्यूडिशियरी में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं’: पूर्व सीजेआई बीआर गवई

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read