Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

‘वह कोर्ट की टिप्पणी नहीं, एसजी का बयान था’, सुप्रीम कोर्ट ने NCERT विवाद पर मामले का किया निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की आठवीं की किताब में जोड़े गए अध्याय में न्यायपालिका को भ्रष्टाचार बताने को लेकर लिए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई को बंद कर दिया है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की आठवीं की किताब में जोड़े गए अध्याय में न्यायपालिका को भ्रष्टाचार बताने को लेकर लिए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई को बंद कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की बेंच ने यह आदेश दिया है.

सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया है कि 22 मई के आदेश में दर्ज यह बात कि करिकुलम को सभी स्तरों पर कमेटी के सामने नहीं रखा गया था और इसलिए इसे सामूहिक फैसला नहीं कहा जा सकता. सिर्फ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का बयान था. यह न तो कोर्ट की कोई टिप्पणी थी और न ही कोई आदेश. इसके साथ ही कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एनसीईआरटी द्वारा मांगी गई माफी को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव और एनसीईआरटी के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

मामले की गहन जांच कराई जाएगी- CJI सूर्यकांत

कोर्ट ने पूछा था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना या कानून के अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों न कि जाए. कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब के उस चैप्टर पर बैन लगा दिया था, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र था. कोर्ट ने किताब की कॉपी के प्रकाशन, पुण्मुद्रण और डिजिटल रूप से साझा करने पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि किसी भी रूप में कॉपी साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि मामले को बंद नही किया जाएगा. इसकी गहन जांच कराई जाएगी. इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि बिल्कुल सही है, NCERT द्वारा जो किया गया है, उसकी भरपाई आपके मुताबिक ही होनी चाहिए.

वही जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा था कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां बन गई होगी. यह कैसे किया गया, यह जानना जरूरी है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि हमारे संविधान निर्माताओं ने गहन संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ यह सुनिश्चित किया था कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका तीनों की संवैधानिक जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हो, ताकि वे स्वायत्तता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके और हमारे राष्ट्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा कर सकें.

NCERT ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8 के लिए ‘Exploring Society: India and Beyond, Vol ii नाम की सोशल साइंस भाग-2 की किताब जारी की थी. किताब आने के बाद यह देखा गया कि चैप्टर 4 ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ (पेज 125-142) पर है. अध्याय में लिखा है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है. गरीबों और वंचितों के लिए इससे न्याय तक पहुच का मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है.

यह भी पढ़ें: ‘हम आते-जाते रहेंगे, लेकिन वे खुद को स्थायी समझते हैं’ CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री सुधार के लिए बनाई उच्चस्तरीय कमेटी

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital