वर्ष 2022 में गठित जे. के बांठिया आयोग को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पार्टी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने महाराष्ट्र सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
दायर याचिका में कहा गया है कि बांठिया आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण के लिए राजनीतिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट का पालन नही किया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण की दलील है कि बांठिया आयोग ने राजनीतिक पिछड़ेपन का कोई आंकलन नही किया. आयोग ने राजनीतिक पिछड़ेपन की स्वतंत्र और विशिष्ठ पहचान करने का प्रयास नहीं किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करना अनिवार्य किया था.
आरक्षण प्रक्रिया पर संकट
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ओबीसी और एसईबीसी सूचियों को ही आधार बना लिया, यह जांचे बिना कि ये वर्ग राजनीतिक रूप से पिछड़े हैं या नही. मतदाता सूची सर्वे के जरिए उपनामों को जाति से जोड़ने की कोशिश की गई. बता दें कि संविधान पीठ ने स्थानीय निकायों में आरक्षण को लेकर तीन शर्ते तय की थी- राजनीतिक पिछड़ेपन की कठोर अनुभवजन्य जांच, एक समर्पित आयोग द्वारा आयोग की सिफारिशों के अनुसार स्थानीय निकाय-वार आरक्षण का निर्धारित कुल आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. दायर याचिका में कहा गया है कि बांठिया आयोग इन तीनों में.से पहली और मिल शर्त पर ही विफल रहा.
सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश
दायर याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक पिछड़ेपन की जांच के लिए एक नया समर्पित आयोग तत्काल गठित किया जाए, ताकि महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण को नए सिरे से किया जा सके. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि यही एकमात्र तरीका है, जिससे गैर-,पालन की यह श्रृंखला टूटेगी और भविष्य के चुनाव के. कृष्णा मूर्ति फैसले व ट्रिपल टेस्ट के अनुरूप हो सकेंगे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र को निर्देश दिया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नही होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि जमीनी स्तर की लोकतंत्र को रोका नहीं जा सकता है.
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि रेलगाड़ी के डिब्बे की तरह आरक्षण हो गया है, जो इसमें चढ़ गए हैं, वे दूसरों को आने नहीं देना चाहते है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि क्यों कुछ ही वर्ग के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए? बाकी लोगों को आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए, जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े हैं. यह राज्यों की जिम्मेदारी है कि इस पर विचार करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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