Bharat Express DD Free Dish

प्रोजेक्ट्स शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी जरूरी- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसके तहत कंपनियों को बिना पर्यावरण पूर्व मंजूरी (Environmental Clearance) के परियोजना शुरू करने और बाद में मंजूरी लेने की अनुमति दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से बुजुर्गों की सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी.

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें बिना पर्यावरण पूर्व मंजूरी के काम शुरू करने और उसके बाद पर्यावरण मंजूरी लेने की अनुमति दी गई थी. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह फैसला दिया है.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला भावी प्रभाव से लागू होगा और पहले से पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त परियोजनाएं इससे प्रभावित नहीं होगी. कोर्ट ने 49 याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के पास पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत वैधानिक अधिसूचना जारी कर ऐसी व्यवस्था बनाने का अधिकार है. लेकिन यह काम केवल प्रशासनिक आदेश या ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि 2006 की इआईए अधिसूचना के तहत पूर्व पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है और इसमें बदलाव केवल वैधानिक अधिसूचना से ही संभव है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की नीति को ठहराया गलत

केंद्र सरकार के 2021 के आदेश के तहत कंपनियां बिना पर्यावरण मंजूरी के भी अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सकती थी और बाद में सरकार से मंजूरी ले लेती थी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस 2021 वाले आदेश को पूरी तरह खत्म कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बाद माफी मांगने की यह व्यवस्था गलत है. आगे से कोई भी कंपनी बिना पहले इजाजत लिए अपना काम शुरू नहीं कर पाएगी.

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा था कि यह पूर्वव्यापी मंजूरी देता है, पर एकमुश्त नियमितीकरण नही है.

एएसजी भाटी ने कहा कि सरकार पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को कमजोर करने की कोई सिफारिश नही करती है और कानून के दायरे का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से संचालित होने वाली इकाइयों को पहले बंद करना होगा, फिर विशेषज्ञ मूल्यांकन से गुजरना होगा. भारी जुर्माना देना होगा और पिछली नुकसान के लिए उपचारात्मक योजना प्रस्तुत करनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी असाधारण परिस्थिति में जनहित को देखते हुए राहत देने की आवश्यकता हो तो केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर सीमित अवधि के लिए एक.मुश्त राहत योजना ला सकती है. हालांकि ऐसी व्यवस्था केवल कार्यालय ज्ञापन के जरिएनही बनाई जा सकती और न इसे नियमों के उल्लंधन को नियमित करनेका स्थायी माध्यम बनाया जा सकता है.

ये भी पढ़ें- बिना सबूत अवैध प्रवासियों को देश से नहीं निकाल सकते- दिल्ली हाईकोर्ट

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read