सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से चुनाव निगरानी कर रहे पूर्व जजों को यात्रा भत्ता न देने पर सवाल किया कि क्या? पर्याप्त मानदेय और यात्रा भत्ता क्यों नही दे रही है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बीसीआई से यह सवाल पूछा है.
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वी गिरी ने इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि मानदेय चुनाव समिति के.सदस्यों के पद के अनुरूप होना चाहिए, जो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या जस्टिस रह चुके है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को उन्होंने सुझाव दिया लेकिन बीसीआई ने कहा कि यह बहुत ज्यादा है और उनके लिए ऐसा करना संभव नहीं हो सकता है.
सीजेआई सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आपने चुनाव शुल्क इस आधार पर तय किया कि इससे चुनाव कराने के लिए पर्याप्त फंड मिलेगा. अब आप पूर्व जजों से कह रहे है कि आप उन्हें मानदेय नहीं दे सकते, आप यात्रा भत्ता नही दे सकते. वे क्या करेंगे.?क्या उनके पास अपना खुद का विमान है? गिरी ने कहा कि एक जज जिन्हें कमेटी का सदस्य बनाया गया था, उन्होंने कहा कि सारी बुकिंग जजों को खुद ही करनी होगी. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि जजों को बुकिंग अपनी जेब से पैसे देकर करनी पड़ती है. यह सही नही है. सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई के वकील वी गिरी से पूछा आपने राजस्थान को शामिल क्यों नहीं किया और आप अलग से समिति क्यों गठित कर रहे हैं? गिरी ने कोर्ट को बताया कि इस समिति ने चुनावों की अधिसूचना भी जारी कर दिया है.
SC ने बीसीआई से 28 जनवरी तक जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी तक जवाब देने को कहा है. गिरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राजस्थान बार काउंसिल चुनावों के लिए अपनी समिति बनाई. इस बहाने से कि 18 नवंबर 2024 को पारित आदेश में राजस्थान का जिक्र नही था, जिसके तहत समितियों का गठन किया गया. बीसीआई कोर्ट को बताएगी की राजस्थान बार काउंसिल चुनावों के लिए एक अलग समिति का गठन क्यों किया गया? वही बार कॉउंसील्स चुनाव में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के वकीलों को आरक्षण देने की मांग वाली अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप हर जगह है. न्यायपालिका में है, वकीलों के बीच हैं, संसद में भी है.
सीजेआई ने याचिकाकर्ता से कहा कि जब बार काउंसिल 1961 से अस्तित्व में है, संसद में है, तो तब से लेकर अब तक आपने कुछ क्यों नही किया या ऐसी मांग क्यों नहीं उठाई? सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने अब महिलाओं के लिए कुछ किया है, तो आप भी अब जाग गए हैं. आप बस सबकुछ थाली में सजा कर चाहते है. सीजेआई ने यह भी कहा कि महिलाओं ने पिछले दो सालों से हमारी कोर्ट में लड़ाई शुरू की. आखिरकार वे सफल हुई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकारी से संपर्क करने को कहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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