सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट सेक्टर को कंट्रोल करने के लिए बनाए गए कानून रेरा को लेकर अहम टिप्पणी की है. सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है और घर खरीदारों की बजाए डिफॉल्टर बिल्डरों को राहत दे रही है, तो इसे खत्म करने पर विचार करना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
कोर्ट ने रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इस प्रक्रिया में आम जनता या रेरा के आदेशों से प्रभावित लोगों को कोई दिक्कत न हो. कोर्ट ने कहा कि केवल रेरा कार्यालय ही नही बल्कि अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला शिफ्ट किया जाए. ताकि लोगों को अपील के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े.
कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश बनाम नरेश शर्मा के मामले की सुनवाई के दौरान यहां तक कहा कि अब राज्यों को इस संस्था को बनाए रखने या खत्म करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि राज्यों को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर यह किसके लिए बनाया गया है.
धर्मशाला में RERA कार्यालय होगा शिफ्ट
कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में आम खरीदारों को राहत मिलने के बजाए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजर रही है. सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई संस्था अपने उद्देश्य को पूरा करने के विफल रहती है, तो उसके अस्तित्व पर सवाल उठना स्वभाविक है.
बता दें कि विवाद हिमाचल प्रदेश सरकार के उस फैसले को लेकर था, जिसमें राज्य के रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने को लेकर अधिसूचना जारी किया था. जिसके खिलाफ अपील दायर की गई थी. 13 जून 2025 को अधिसूचना पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया था. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार को बड़ी राहत दे दी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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