Mandatory Indian languages in CBSE: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए तीन भाषाओं के अनिवार्य रूप से लागू करने के खिलाफ दायर नई याचिका पर अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने लंबित याचिकाओं से साथ इस याचिका को भी संलग्न कर दिया है.
कोर्ट में मामले पर विस्तार से बहस
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हम आज कोई एक लाइन का आदेश नहीं दे सकते. सीजेआई ने कहा इस मामले में विस्तार से बहस हुई है, अंतरिम राहत का कोई सवाल ही नहीं है. सीजेआई ने पूछा कि फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी सीबीएसई के खिलाफ यहां क्यों आ रही है.? क्या इस तरह की मांग का मकसद कोर्ट या लोगों के मन मे डर पैदा करना है.
कोर्ट ने रिपोर्ट देने को कहा
कोर्ट 15 या 16 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा था कि क्या स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या है? कोर्ट ने व्यवस्था संबंधित मुद्दे पर रिपोर्ट देने को कहा था. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि अचानक इन भाषाओं को सीखकर 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इससे अव्यवस्था फैल जाएगी.
कक्षा 9 और 10 के छात्रो के लिए सर्कुलर जारी
यह याचिका छात्रों, पैरेंट्स और टीचर्स की ओर से दायर की गई है. सीबीएससी ने कक्षा 9 और 10 के छात्रो के लिए सीबीआई ने यह बड़ा बदलाव करते हुए सर्कुलर जारी किया है. जारी अधिसूचना के मुताबिक अब छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होगी. सीबीएसई की ओर से जारी यह अधिसूचना 1 जुलाई से लागू होगा. सीबीएसई की नई सर्कुलर ने छात्रों, अभिभावकों और कई स्कूलों के बीच हलचल पैदा कर दिया है. स्कूल असमंजस में है कि इसे कैसे लागू किया जाए.
व्यवस्था 2026-2027 से लागू
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ना होगा. यह व्यवस्था 2026-2027 से लागू होगी. हिंदी, तमिल, मराठी,बंगाली, गुजराती, कन्नड़, पंजाबी, संस्कृत सहित कई भाषाओं को शामिल किया गया है. सीबीएसई के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों में मातृभाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति गतिविधि मजबूत करना है.
असेसमेंट सिर्फ स्कूल लेवल तक सीमित
सीबीएसई ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए तीन भाषाओं का पढ़ना अनिवार्य कर दिया है. लेकिन तीसरी भाषा (आर 3) के पेपर को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया गया है. तीसरी भाषा का असेसमेंट सिर्फ स्कूल लेवल तक सीमित रहेगा. हालांकि तीसरी भाषा के इंटरनल मार्क्स या ग्रेड सीबीएसई 10वीं की फाइनल मार्कसीट में शामिल किए जाएंगे. सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 31 मई 2026 तक सभी अपनी तीसरी भाषा तय कर लें.
कई स्कूलों ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन कुछ संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी संस्थानों को भाषा चयन और शिक्षक व्यवस्था जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बोर्ड लगातार स्कूलों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर मदद भी उपलब्ध करा रहा है. ताकि नई व्यवस्था समय पर लागू हो सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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