एआई और डीपफेक मामले में दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकककर्ता को दिल्ली हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है. जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम नहीं कह रहे हैं कि इस मुद्दे को पूरी तरह से खारिज किया जाना चाहिए, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट पिछले कुछ वर्षों से इसपर सुनवाई कर रहा है. आप भी उसमें शामिल हों.
उन्होंने कहा कि अगर हम हस्तक्षेप करेंगे तो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की गई पूरी कवायद बंद हो जाएगी. एआई और डीपफेक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाने की मांग की थी.
एआई का दुरुपयोग गंभीर समस्या बन रही है
सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एआई जेनरेटेड या डीपफेक कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए नियम बनाए जाएं. इसमें केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया था. बता दें कि यह एक वैश्विक समस्या है, जो वैश्विक और गंभीर बनती जा रही है. तकनीक के जरिए किसी तस्वीर या वीडियो में किसी व्यक्ति की जगह अन्य व्यक्ति की तस्वीर लगा दिया जाता है. इससे किसी को भी गुमराह किया जा सकता है.
डीपफेक वीडियो एक बार पोस्ट हो जाए तो शिकायत की जा सकती है. इसपर 72 घंटे में कार्रवाई होती है. अभिनेत्री आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, नोरा फतेही डीपफेक के शिकार हो चुकी हैं. इसके अलावा सचिन तेंदुलकर, टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन दिवंगत रतन टाटा, इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति शामिल है.
होने वाले नुकसान को समझिए क्योंकि आप सरकार हैं: कोर्ट
ज्ञात हो कि दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून और डाटा संरक्षण कानून ही डीपफेक प्रौद्योगिकी से निपटने के लिए पर्याप्त है. जिसपर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा था कि डीपफेक का मुद्दा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में हो रहा है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि अमेरिका जैसे कुछ देशों ने इस मुद्दे से निपटने के लिए कानून बनाये है.
कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस तकनीक से होने वाले नुकसान को समझिए क्योंकि आप सरकार हैं. एक संस्था के रूप में हमारी कुछ सीमाएं होंगी. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे काम करता है. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ने कहा था कि काउंटर एआई तकनीक को रद्द करने के लिए नियोजित किया जा सकता है.
एएसजी ने यह भी कहा था कि एक का पता लगाया जाए, फिर रोकथाम, शिकायत दर्ज करने के लिए तंत्र का निर्माण किया जाए और जागरूकता बढ़ाई जाए. एआई और डीपफेक टेक्नोलॉजी किसी की निजता के हनन के लिए नही होना चाहिए और इसका दुरुपयोग रोकने के लिए दिशा निर्देश तय करने चाहिए, क्योंकि डीपफेक जैसी टेक्नोलॉजी से किसी की छबि को खराब किया जा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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