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‘आपको एक दिन पहले याद आया…’, गो-वध निषेध कानून लागू करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद से पहले गो-वध पर पूर्ण प्रतिबंध से संबंधित कानून को सख्ती से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई ने कहा कि इसमें कोई अर्जेंसी नहीं है.

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देशभर में गायों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध से संबंधित कानून को सख्ती से लागू करने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वरुण सिन्हा ने कहा कि परसों बकरीद है. यह गौहत्या विरोधी कानून लागू करने की अपील है. अगर इसे कल सूचीबद्ध किया जा सके, तो अदालत की ओर से संतुष्ट होने पर अंतरिम आदेश पारित किए जा सकते हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आपको एक दिन पहले याद आया था. कोई अर्जेंसी नहीं है.

2005 के फैसले को लागू करने की मांग

यह याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा वकील वरुण सिन्हा के माध्यम से दायर की गई है. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल जनहित याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है. दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि 2005 में सुप्रीम कोर्ट की सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा दिए गए State of Gujarat vs Mirzapur Moti Kureshi Kassab Jamat फैसले को पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं. उस फैसले में अदालत ने गायों और उनके वंश के वध पर पूर्ण प्रतिबंध को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था.

अवैध बूचड़खानों और गो-तस्करी पर रोक की अपील

याचिका में यह भी कहा गया है कि कई राज्यों में गो-वध निषेध कानून होने और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट फैसले के बावजूद अवैध रूप से गायों का वध जारी है. खासकर ईद और बकरीद के अवसर पर खुलेआम गायों और उनके वंश की बलि दिए जाने का आरोप लगाया गया है. साथ ही बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों में बिना लाइसेंस वाले बूचड़खानों के संचालन का भी मुद्दा उठाया गया है.

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याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्यों की निष्क्रियता के कारण न सिर्फ कानून का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि इससे सांप्रदायिक तनाव भी पैदा हो रहा है. याचिका में बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर कथित गो-तस्करी का भी जिक्र किया गया है और केंद्र व राज्य सरकारों को गो-संरक्षण कानूनों को “सही भावना और अक्षरशः” लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में अदालत से मांग की गई है कि सभी राज्यों को अपने-अपने गो-वध निषेध कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई और गो-तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं.



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