सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और भारतीय मानक ब्यूरों (बीआईएस) द्वारा निर्धारित पेयजल मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए सीजेआई ने सामाजिक वास्तविकताओं को समझने की सलाह दी है.
सीजेआई ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि “महात्मा गांधी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत आए, तो उन्होंने देश की स्थिति और लोगों की दुर्दशा समझने के लिए ग्रामीण क्षेत्रो की यात्रा की.”
यह याचिका एओआर सृष्टि अग्निहोत्री की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में प्लास्टिक पैकेजिंग में एंटीमनी और थैलेट एसिड बीआईएस एस्टर की अनुमेय सीमा पर सवाल उठाए गए थे.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि जमीनी हकीकत या आस्ट्रेलिया जैसे गाइडलाइंस जारी नहीं किए जा सकते है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सक्षम ऑथोरिटी के पास आवेदन देने को कहा है.
कोर्ट ने दी सलाह
कोर्ट ने कहा कि आप देश की जमीनी हकीकत का सामना करें, गरीबों का कोई हिमायती नहीं है, यह सब अमीरों और शहरी लोगों का फोबिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि गांवों और पिछड़ों हुए क्षेत्रों में जाकर देखें कि वहां पानी के लिए लोगों को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. जब वह इन इलाकों में जाएंगे और ऐसी चीजें देखेंगे तो उन्हें जमीनी स्तर की हकीकत का पता चलेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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