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कैश फॉर जॉब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित आरोपी तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी की ओर से की गई टिप्पणी हटाने की मांग को खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन टिप्पणियों का लंबित ट्रायल पर कोई असर नहीं होगा.

सेंथिल बालाजी-SC
Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट ने कैश फॉर जॉब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित आरोपी तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को लेकर की गई टिप्पणी को हटाने से इनकार कर दिया है.

बालाजी ने तीन अलग-अलग फैसलों में कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी को हटाने की मांग की थी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हम कुछ भी नहीं हटाएंगे, एक शब्द भी नहीं. हम केवल यह स्पष्ट कर रहे हैं कि इन टिप्पणियों का लंबित ट्रायल पर कोई असर नहीं होगा.

यह आपराधिक न्यायशास्त्र का बुनियादी सिद्धांत है.बालाजी की ओर से दायर अर्जी में कहा गया था कि 8 सितंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया था कि कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी से उनके खिलाफ निचली अदालत में चल रहे ट्रायल को प्रभावित कर सकता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई के उनके अधिकार का उल्लंघन करती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि क्रिमिनल कानून का एक नौदिखिया भी पीसी एक्ट के अपराधों को अंतिम रिपोर्ट से बाहर नही रखता है.

कोर्ट ने जांच अधिकारी के मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह वॉर करना चाहता था, लेकिन घाव देने से डरता था. कोर्ट ने राज्य की जांच में पक्षपात पूर्ण रवैये की आलोचना करते हुए कहा था कि पूरे घोटाले की समग्र जांच होनी चाहिए न कि टुकड़ों में.

सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को दी जमानत

बता दें कि इसी साल अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि वे मंत्री पद नही छोड़ते है तो उनकी जमानत को रद्द कर दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि याचिका में आशंका जताई गई है कि कोर्ट से जमानत मिलने के तुरंत बाद सेंथिल बालाजी को मंत्री बना दिया गया, जिसकी वजह से गवाह दबाव में आ सकते है क्योंकि वह कैबिनेट में सीनियर मंत्री है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सेंथिल बालाजी के दोबारा मंत्री बनने से गवाह दबाव में आ जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने बालाजी को इस आधार पर जमानत दी थी कि ट्रायल जल्द शुरू होने के आसार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को सेंथिल बालाजी को इस आधार पर जमानत दी थी कि वह जून, 2023 से कैद में है और ट्रायल के जल्दी शुरू होने की कोई संभावना नही है.

जेल से रिहा होने के तीन दिन बाद ही 29 सितंबर को तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार में सेंथिल बालाजी ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली थी.

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ने का दिया आदेश

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-भारत एक्सप्रेस 



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