सुप्रीम कोर्ट से ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित पोस्ट करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद अमीर अजमद अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने हरियाणा सरकार के जवाब के बाद मामले को बंद करने का फैसला किया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है.
मामले को बंद करने का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसबी राजू ने कोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार ने महमूदाबाद पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देते हुए मामले को बंद करने का फैसला किया है.
वहीं, महमूदाबाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि हरियाणा सरकार के हम आभारी है. सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कभी-कभी बातों के बीच में छिपे अर्थ को लिखने से और अधिक समस्याएं पैदा हो जाती है. उन्होंने कहा कि कभी-कभी स्थिति इतनी संवेदनशील होती है कि हम सभी को सतर्क रहना पड़ता है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक उच्च विद्वान व्यक्ति होने के नाते भविष्य में विवेकपूर्ण तरीके से कार्य करेंगे.
निचली अदालत ने नहीं लिया संज्ञान
पिछली सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुका है, लेकिन निचली अदालत ने अभी तक उसपर संज्ञान नहीं लिया है. उन्होंने कहा था कि दो आरोपों पर राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है, जो अभी तक नहीं मिली है.
इसपर सीजेआई ने पूछा था कि मंजूरी कौन देगा. एसवी राजू ने बताया था कि यह स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा दी जानी है. एएसजी ने बताया था कि 22 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई थी और उसमें स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति लंबित है.
मामले को रखे सीमित
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि कोर्ट पहले ही यह कह चुकी है कि मामले को केवल पोस्ट की सामग्री तक सीमित रखकर देखा जाए. उन्होंने कहा था कि पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे अपराध बनता हो. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि यदि सक्षम प्राधिकारी नरम रुख अपनाता है तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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