IndiGo की 1000 से ज्यादा उड़ानों को रद्द किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने सीजेआई सूर्यकांत को पत्र लिखकर पूरे संकट पर स्वतः संज्ञान लेने और तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है.
वैकल्पिक यात्रा और मुआवजे की मांग
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा और मुआवजे की मांग की गई है. दायर याचिका में यात्रियों को भारी परेशानी और मानवीय संकट पैदा होने का दावा किया है और त्वरित हस्तक्षेप की मांग की गई है. उड़ान रद्द होने के कारण पायलटों के नए FDTL नियमों की योजना को गलत बताया गया है.
याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह से उड़ानों को रद्द करना अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन है. याचिका में कहा गया है कि देशभर में इंडिगो की उड़ानें लगातार चौथे दिन भी बाधित रही. छह बड़े मेट्रो शहरों में एयर लाइंस का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 8.5 प्रतिशत गिर गया है. हजारों यात्री जिनमें बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और बीमारी से जूझ रहे लोग शामिल है, जो एयरपोर्ट पर घंटो फंसे रहे.
मेडिकल जरूरतों की अनदेखी
याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरपोर्ट पर खाने-पीने, आराम, कपड़े, दवाइयों और रहने की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गई. जबकि एयरलाइन ने खुद मान लिया है कि उसके पास पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. अनेक मामलों में आपातकालीन मेडिकल जरूरतों की भी अनदेखी कर दी गई है. कंपनी ने पायलटों की कमी, मौसम, तकनीकी खराबी और नए फ्लाइट डियूटी टाइम नियमो को जिम्मेदार ठहराया गया है. हालांकि इंडिगो ने इसे फिलहाल वापस ले लिया है.
FDTL के दूसरे चरण के तहत नवंबर से पायलटों के लिए नाइट डियूटी पर सख्ती बरती गई थी. जिसकी तैयारी इंडिगो ने ठीक से नहीं किया. पायलट यूनियन ने आरोप लगाया कि कंपनी ने लंबे समय से स्टाफ रखने की नीति अपनाई, जिसका नतीजा यह संकट है.
नए नियमों संकट की वजह
IndiGo संकट के बाद केंद्र सरकार ने फ्लाइट में गड़बड़ी के कारणों और जवाबदेही का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है. यह संकट नए नियमों के कारण उत्पन्न हुआ है. जिनमें पायलटों की साप्ताहिक आराम अवधि को 12 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है और प्रति सप्ताह केवल दो रात की लैंडिंग की अनुमति दी गई है.
जबकि पहले छह थी. इंडिगो ने बड़े पैमाने पर कैंसलेशन का कारण गलत अनुमान और प्लानिंग में कमी बताया. इसलिए सरकार ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के फ्लाइट डियूटी लिमिटेड नियमों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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