आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री पेरिरेड्डी रामचंद्र रेड्डी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है.
रेड्डी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हाई कोर्ट ने रेड्डी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए बुग्गा मठ की जमीन के मामले में अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख करने का निर्देश दिया था.
बुग्गा मठ की भूमि बेदखली से संबंधित बंदोबस्ती विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए पेड्डीरेड्डी ने हाई कोर्ट ने लंच मोशन याचिका दायर की थी. जिसपर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को वापस भूमि न्यायाधिकरण में जाने का निर्देश दिया था और बंदोबस्ती विभाग को 15 दिनों तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने को कहा था.
रेड्डी ने आरोप लगाते हुए कहा कि “मुझे मदनपल्ले में आग की घटना के लिए पहले भी निशाना बनाया गया था, जहां कुछ फाइलें जल गई थी. 9 महीने बाद भी कोई भी.मेरी संलिप्तता साबित नही कर पाया. फिर 40000 करोड़ की रेत के अवैध खनन और फिर नेपाल में लाल चंदन की तस्करी का आरोप लगा. मेरे खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप को अब तक बिना किसी संदेह के साबित नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करते है.”
रामचन्द्र रेड्डी ने कहा कि एन. किरण रेड्डी और बाद में एन. चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने-अपने कार्यकाल के दौरान बुग्गी मठ मामले की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन कुछ भी साबित नही हुआ.
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