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संभल और मथुरा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; जानें क्या है 14 जुलाई को होने वाली ‘सुलह वार्ता’?

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी, मथुरा और संभल मामले को आपसी समझौते के लिए ‘विशेष लोक अदालत’ में ट्रांसफर कर दिया है. इसके लिए 21 से 23 अगस्त तक विशेष अदालत लगेगी, जबकि 14 जुलाई को वाराणसी में पहली पूर्व सुलह वार्ता होगी.

Supreme Court Transfers Gyanvapi, Mathura & Sambhal Disputes to Special Lok Adalat

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Edited by Vaibhav Gupta

वाराणसी के ज्ञानवापी, संभल के हरिहर मंदिर और मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने हिंदू मुस्लिम के इस विवाद को विशेष लोक अदालत भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने लोक अदालत के जरिए आपस में बैठकर मामले को सुलझाने की बात कही है. इस समाधान के लिए आगामी 21, 22 और 23 अगस्त को एक विशेष लोक अदालत लगाई जाएगी.

सुलह वार्ता पर होगी सुनवाई

इससे पहले 14 जुलाई को वाराणसी में लोक अदालत से पहले पूर्व सुलह वार्ता पर सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर दिया गया है. ज्ञानवापी वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी से जुड़ा एक ऐतिहासिक और कानूनी मामला है.

सुप्रीम कोर्ट के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष लोक अदालतों के आयोजन करने का फैसला लिया है. इसके तहत आपसी समाधान वाले और बरसो से लंबित पड़े पुराने मुकदमे को लोक अदालत में ट्रांसफर किया जा रहा है. ज्ञानवापी जैसे बेहद जटिल और संवेदनशील मामलों में कोर्ट की कोशिश होगी कि दोनों पक्ष एक साथ बैठकर आपस मे बातचीत कर इसका समाधान निकाले, ताकि अदालतों पर लंबित मुकदमों का बोझ कम हो.

मस्जिद कमेटी ने अदालत को किया गुमराह

संभल विवाद मामले में पिछली सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि संभल जामा मस्जिद में जो कुआं है, वह पब्लिक लैंड पर हैं. खुद मस्जिद कमेटी ने गलत फोटो पेश करके अदालत को गुमराह करने की कोशिश की हैं. सरकार ने मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के उस दावे को खारिज कर दिया था, जिसमें कुएं को मस्जिद की प्रॉपर्टी बनाया गया था.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि शाही जामा मस्जिद भी सरकारी जमीन पर बनाई गई है. इसमें कहा गया है कि मस्जिद वाला कुआं उन 19 कुंओं का हिस्सा हैं, जिन्हें जिला प्रशासन की ओर से पुनर्जीवित किया जा रहा है. इनका वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण के बाद सभी समुदाय इस्तेमाल कर सकेंगे. इन प्राचीन कुओं को दोबारा जीवित किया जा रहा है. ऐतिहासिक रूप से ये क्षेत्र काफी अहमियत रखती है.

गौरतलब है कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद परिसर को लेकर भूमि विवाद लंबे समय से जारी है. उत्तर प्रदेश में अयोध्या की राम जन्मभूमि मंदिर के तर्ज पर ही मथुरा में भी अलग और भव्य मंदिर बनाने की मांग हो रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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