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बॉम्बे में कबूतरखानों में दाना डालने पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई कबूतरखाना विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने पर लगी पाबंदी को बरकरार रखते हुए उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का आदेश दिया.

Supreme Court
Edited by Akansha

कबूतर प्रेमियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बुरी खबर है. कोर्ट ने मुंबई के कबूतरखानों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करना ठीक नही है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने पर लगाया था प्रतिबंध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद जो लोग भी कबूतरों को दाना डाल रहे है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस अदालत का समानांतर हस्तक्षेप उचित नहीं है.

नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया था फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उसने नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि कबूतरों की बीट से।सांस संबंधी बीमारियों का खतरा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया था कि वह विशेषज्ञों की मदद से वैकल्पिक उपायों पर विचार करें.

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दाना खिलाने वाले 142 लोगों पर जुर्माना

वहीं कोर्ट के आदेश के बावजूद दाना खिलाने वाले 142 लोगों पर जुर्माना लगा चुकी है और करीब 68700 रुपए वसूल चुका है. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जैन समुदाय लगातार विरोध कर रहा है. जैन समुदाय का कहना है कि यह जीवदया के खिलाफ है. कई कबूतरखाने सैकड़ों साल पुराने है और वहां लंबे समय से कबूतरों को दाना डालने की परंपरा चली आ रही है.

गुजराती समुदाय के लोगों ने किया था विरोध प्रदर्शन

पिछले दिनों जैन और गुजराती समुदाय के लोगों ने मुंबई में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था और दादर कबूतरखाने के ऊपर लगे तिरपाल को फाड़ दिया था और वहां कबूतरों को दाना डाला था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को यह भी निर्देश दिया था कि वो शहर के सभी अस्पतालों का डेटा पेश करे, लेकिन अब तक डेटा नहीं दिया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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