दिल्ली हाई कोर्ट ने यूएपीए के मामले में आरोपी और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की ओर से दायर जमानत याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की बेंच दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है. ताहिर हुसैन ने निचली अदालत की ओर से खारिज जमानत याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनौती दी है. कोर्ट इस मामले में पहले भी सख्त रुख अख्तियार कर चुका है.
इससे पहले जनवरी में दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था. कड़कड़डूमा कोर्ट के स्पेशल जज ने अपने फैसले में कहा था कि हुसैन को 2024 में भी राहत नही दी गई, क्योंकि उनपर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा था कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने पांच आरोपियों-मो. सलीम खान, गुलफिशा फातिमा, शादाब अहमद, शिफा-उर-रहमान और मीरान हैदर को जमानत दी है, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को मुख्य साजिशकर्ता होने के आधार पर राहत नही दी है. ताहिर हुसैन दिल्ली दंगों के आरोप में 4 साल 9 महीने से जेल में बंद है.
यूएपीए मामले में पांच आरोपियों को राहत
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को छोड़कर गुलफिशा फातिमा सहित पांच आरोपियों को जमनात दे दिया था. उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य का परित्याग नहीं है. उचित प्रयोग के लिए न्यायालय को एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होते हैं? क्या आरोपी की भूमिका का अपराध घटित करने से कोई उचित संबंध है? कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट ने जमानत की मांग को ठुकराया है. कोर्ट ने कहा था इस प्रक्रिया से साजिश के अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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