विकास यादव, जो नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी हैं, को सुप्रीम कोर्ट से फरलो मिल गई है. कोर्ट ने 7 मार्च को सरेंडर करने का आदेश दिया है. विकास यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट से फरलो नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. मामले की सुनवाई में नीलम कटारा की ओर से पेश वकील ने फरलो का विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने विकास और विशाल यादव को मौत की सजा से राहत दी थी और आजीवन कारावास को 25 साल की सजा में बदल दिया था.
7 मार्च को सरेंडर करने का आदेश
साल 2002 के बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में तिहाड़ जेल में बंद दोषी विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने विकास यादव को फरलो दे दिया है. साथ कोर्ट ने विकास यादव को सात मार्च को सरेंडर करने का आदेश दिया है.
फरलो की मांग का विरोध
दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद विकास यादव ने फरलो की मांग को लेकर, सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. मामले की सुनवाई के दौरान नीलम कटारा की ओर से पेश वकील ने विकास यादव द्वारा फरलो की मांग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि विकास यादव की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने विकास यादव को फरलो देने से इनकार कर दिया था.
कोर्ट का मौत की सजा से इंकार
अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक अस्वीकृति उसके आचरण के मूल्यांकन के बाद हुई, जिसे असंतोषजनक माना गया था. विकास यादव को सजा काटते हुए 23 साल से अधिक हो गए हैं. निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ विकास और विशाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने विकास और विशाल को आजीवन कारावास की सजा को 25 साल की सजा में तब्दील कर दिया था.
17 फरवरी 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास यादव और विशाल यादव को मौत की सजा देने से इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला केवल हत्या का है न कि जघन्यतम अपराध का. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस मामले में आजीवन जेल में रखने की भी सजा नही दी जा सकती.
-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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