अदाणी की महाकुंभ सेवा को मिला 101 साल पुराने संगठन का साथ
प्रयागराज, 18 जनवरी 2025: जहां एक ओर महाकुंभ 2025 श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था के मामले में नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं उद्योगपति भी श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं. इस बार देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अदाणी ने 101 साल पुरानी धार्मिक संस्था गीता प्रेस के साथ मिलकर श्रद्धालुओं की सेवा की दिशा में कदम बढ़ाया है. गीता प्रेस, जो विश्वभर में हिंदू धर्म से संबंधित साहित्य के प्रकाशन और प्रचार-प्रसार वाला अग्रणी समूह है, अब अदाणी समूह के साथ मिलकर श्रद्धालुओं को मुफ्त में आरती संग्रह उपहार स्वरूप वितरित कर रहा है.
गीता प्रेस का इतिहास काफी पुराना और सम्मानजनक है. इसकी शुरुआत 1923 में गोरखपुर के उर्दू बाजार में एक छोटे से कमरे से हुई थी. धीरे-धीरे गीता प्रेस ने हिंदू संस्कृति और साहित्य के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 29 अप्रैल 1955 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गीता प्रेस भवन और लीला चित्र मंदिर का उद्घाटन किया था. 2022 में इस संगठन ने अपनी शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया.
गीता प्रेस और अदाणी समूह की साझेदारी
अब, गीता प्रेस और गौतम अदाणी के नेतृत्व में अदाणी समूह ने मिलकर महाकुंभ क्षेत्र में आरती संग्रह का वितरण शुरू किया है. इस संग्रह में 102 आरतियां शामिल हैं, जिनमें देवी-देवताओं की विशेष आरतियां जैसे गणेश, श्रीराम, श्रीकृष्ण, लक्ष्मी-नारायण, दुर्गा आदि की आरतियां शामिल हैं. अदाणी समूह का लक्ष्य 1 करोड़ आरती संग्रह की प्रतियां वितरित करना है.
महाकुंभ में की जा रही श्रद्धालुओं की सेवा
महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की सेवा को और बेहतर बनाने के लिए अदाणी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. सेक्टर-19 में अदाणी समूह ने इस्कॉन के साथ मिलकर महाप्रसाद वितरण की व्यवस्था की है, जहां हर दिन लगभग 1 लाख श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं. इसके अलावा, असहाय, दिव्यांग, बुजुर्ग और छोटे बच्चों वाली माताओं के लिए मुफ्त गोल्फ कार्ट सेवा भी प्रदान की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को त्रिवेणी स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने में आसानी हो रही है.
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा
अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने भारतीय आध्यात्मिकता के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया है. इस संकल्प के तहत गीता प्रेस और अदाणी समूह मिलकर महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सेवा में योगदान दे रहे हैं. यह सांस्कृतिक और धार्मिक यात्रा न केवल भारत के अंदर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद करेगी.
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