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Sonu Nigam Birthday Special: सुरों के सिरमौर की अनसुनी कहानी, जब गाते-गाते बह निकला खून, ‘सारेगामा’ ने बनाया घर-घर का नाम

सोनू निगम की आवाज, उनकी मेहनत और जीवन से जुड़े वो अनसुने किस्से जो हर संगीत प्रेमी को जानने चाहिए. जानिए कैसे एक गाने के दौरान बह निकला खून और क्यों मानते हैं रफी साहब को अपना गुरु.

sonu nigam birthday

Sonu Nigam Birthday: बॉलीवुड की म्यूज़िक इंडस्ट्री में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो वक्त के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि और भी निखरती जाती हैं. सोनू निगम उन्हीं में से एक हैं. सुर, सादगी और सच्चाई का ऐसा संगम शायद ही कहीं और मिले. 30 जुलाई को जन्मे सोनू निगम ने न सिर्फ अपनी गायिकी से लोगों को दीवाना बनाया, बल्कि अपनी सादगी और मेहनत से एक अलग मुकाम भी हासिल किया. चलिए, तस्वीरों के जरिए जानते हैं उनके जीवन और करियर से जुड़े कुछ बेहद खास किस्से.

सोनू निगम को गाना विरासत में मिला था. जब वो सिर्फ चार साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता के साथ स्टेज पर मोहम्मद रफी का गाना “क्या हुआ तेरा वादा” गाकर सबका ध्यान खींच लिया. इतनी कम उम्र में इतना गहरा भाव और सुरों की पकड़ देख लोग हैरान रह गए थे. यहीं से शुरू हुआ एक सफर, जो अब तक थमा नहीं है.

90 के दशक की शुरुआत में सोनू ने फिल्म ‘जानम’ के लिए पहला गाना रिकॉर्ड किया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और ‘हम तो छैला बन गए’ जैसे टीवी सॉन्ग से शुरुआत की. 1993 में फिल्म ‘आजा मेरी जान’ के गाने ‘ओ आसमानवाले’ ने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाज़े खोले.

साल 1995 में जब उन्होंने टीवी शो ‘सारेगामा’ को होस्ट किया, तब उन्होंने ना सिर्फ गायिकी, बल्कि अपनी विनम्रता और ज्ञान से भी दर्शकों का दिल जीत लिया. शो के दौरान उनकी मौजूदगी और संवाद शैली ने उन्हें युवा दिलों की धड़कन बना दिया और म्यूज़िक इंडस्ट्री में उनकी पकड़ और भी मजबूत हो गई.

गायन में डूब जाना क्या होता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण सोनू निगम हैं. फिल्म ‘परदेस’ के मशहूर गाने ‘ये दिल दीवाना’ को रिकॉर्ड करते समय उन्होंने इतनी शिद्दत से गाया कि सच में उनके गले से खून निकल आया. ये किस्सा खुद निर्देशक सुभाष घई ने एक सिंगिंग शो में शेयर किया और बताया कि सोनू ने दर्द को सच में महसूस कर गाया था.

सोनू निगम की आवाज़ में जो मिठास और भाव हैं, उनका बड़ा हिस्सा मोहम्मद रफी से प्रेरित है. सोनू ने अपने पहले एल्बम ‘रफी की यादें’ में रफी साहब के गाने गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी. कई बार सोनू ने खुद कहा है कि अगर किसी एक इंसान से उन्होंने गाना सीखा है, तो वो रफी साहब हैं. अपने माता-पिता के बाद वो उन्हें ही अपना सच्चा गुरू मानते हैं.

बहुत कम लोग जानते हैं कि सोनू निगम ने बाल कलाकार के तौर पर कई फिल्मों में काम किया है. ‘प्यारा दुश्मन’ और ‘हमसे है जमाना’ जैसी फिल्मों में वे नन्हे सोनू के रूप में नजर आ चुके हैं. बाद में उन्होंने ‘जानी दुश्मन’, ‘लव इन नेपाल’ जैसी फिल्मों में लीड रोल भी निभाया, हालांकि अभिनय में उन्हें वो सफलता नहीं मिली जो संगीत में मिली.

सोनू निगम को एक भाषा में सीमित करना मुश्किल है. उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, गुजराती, भोजपुरी और ओडिया समेत कई भाषाओं में गाया है. इतना ही नहीं, उन्होंने ‘ब्लू’ फिल्म में अंतरराष्ट्रीय गायिका काइली मिनॉग के साथ भी गाना गाया था. यह दिखाता है कि उनकी आवाज़ की पहुंच सिर्फ देश ही नहीं, विदेश तक भी है.

सोनू निगम की निजी ज़िंदगी भी उनके प्रोफेशन जितनी खूबसूरत है. उन्होंने साल 2002 में मधुरिमा मिश्रा से शादी की. दोनों की पहली मुलाकात एक स्टेज शो में हुई थी और सात साल की दोस्ती के बाद उन्होंने शादी की. उनका बेटा नुवान भी चर्चा में रह चुका है, खासकर जब उसने ‘कोलावरी डी’ गाने का अपना वर्जन गाया था. सोनू अक्सर कहते हैं कि परिवार ही उनका सबसे बड़ा सहारा है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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