Amarnath Yatra 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन का इंतजार अब खत्म होने वाला है. 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हो रही है जो इस बार 28 अगस्त तक चलेगी. करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 29 जून को पवित्र गुफा में प्रथम पूजा संपन्न कर यात्रा का औपचारिक शुभारंभ कर दिया है. वहीं श्रद्धालुओं का पहला जत्था भी जम्मू के बेस कैंप पहुंचना शुरू हो गया है.
इस वर्ष यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर खास जोर दिया गया है. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक को शामिल किया है ताकि लाखों श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें.
AI और ड्रोन रखेंगे हर गतिविधि पर नजर
इस बार अमरनाथ यात्रा की सबसे बड़ी खासियत हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था है. पूरे यात्रा मार्ग पर ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सुरक्षा प्रणाली भी सक्रिय रहेगी. यात्रा मार्ग पर 34 फेसियल रिकॉग्निशन कैमरे लगाए गए हैं जो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे.
यात्रा के दौरान तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी. सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान पूरे मार्ग पर तैनात रहेंगे. इसके अलावा स्निफर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते भी सुरक्षा में लगाए जाएंगे. राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर सभी बेस कैंपों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी लगातार ग्राउंड पर मौजूद रहेंगे.
जम्मू में बना नया इंटीग्रेटेड फैसिलिटेशन सेंटर
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार जम्मू के तवी रिवरफ्रंट पर नया इंटीग्रेटेड फैसिलिटेशन सेंटर तैयार किया गया है. यहां मेडिकल जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और जरूरत पड़ने पर ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी. इस केंद्र में करीब 4,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है.
इस बार पंजीकरण कराने वाले सभी श्रद्धालुओं को श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की ओर से 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया जाएगा. इसके अलावा यात्रा के दौरान RFID कार्ड साथ रखना अनिवार्य होगा. बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद मिलने वाला यही कार्ड बालटाल और पहलगाम (चंदनवाड़ी) मार्ग के प्रवेश द्वारों पर मान्य होगा.
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घोड़े, पालकी और पिट्ठू के तय किए गए रेट
श्रद्धालुओं को अधिक पैसे वसूलने जैसी समस्याओं से बचाने के लिए प्रशासन ने इस बार घोड़े, पालकी, पिट्ठू और पोर्टर की दरें पहले ही तय कर दी हैं. इन सेवाओं के लिए प्री-पेड काउंटर भी बनाए गए हैं, जहां से यात्री पहले से बुकिंग करा सकेंगे.
दो रास्तों से होगी यात्रा
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के पास दो मार्ग उपलब्ध हैं. पहला पारंपरिक पहलगाम मार्ग है, जिसकी लंबाई लगभग 41 किलोमीटर है. यह रास्ता अपेक्षाकृत लंबा है और इसे पूरा करने में तीन से चार दिन लगते हैं. इस मार्ग पर श्रद्धालु शेषनाग और पंचतरणी जैसे प्रमुख पड़ावों से होकर गुजरते हैं.
दूसरा रास्ता बालटाल मार्ग है, जिसकी लंबाई करीब 7 किलोमीटर है. यह दूरी कम होने के कारण यात्रा जल्दी पूरी हो जाती है, लेकिन रास्ता काफी खड़ी चढ़ाई वाला और चुनौतीपूर्ण माना जाता है. इसलिए इस मार्ग पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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