Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विश्वभर में काफी प्रसिद्ध है. हर साल आषाढ़ महीने में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर बैठकर मुख्य मंदिर से निकलते हैं और करीब 3 किलोमीटर दूर ‘गुंडिचा मंदिर’ जाते हैं. इस यात्रा को लेकर बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर यह गुंडिचा मंदिर का इस रथ यात्रा से जुड़ा महत्व क्या है? भगवान यहां 9 दिन क्यों रहते हैं? और रानी गुंडिचा कौन थीं, जिन्हें भगवान की ‘मौसी’ कहा जाता है? तो आइए आज इसके पीछे जुड़ी पौराणिक कथा जान लेते हैं.
कौन थीं रानी गुंडिचा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार पुरी के राजा इंद्रद्युम्न ने ही भगवान जगन्नाथ का मुख्य मंदिर बनवाया था. उनकी पत्नी का नाम रानी गुंडिचा था. रानी भादवान को बहुत मानती थीं लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी. वह भगवान जगन्नाथ को ही अपने बेटे की तरह प्यार करती थीं.
रानी की सच्ची भक्ति से खुश होकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें वादा दिया था कि वे हर साल उनके घर मिलने आएंगे. बस इसी वादे के बाद से ही रानी गुंडिचा को भगवान जगन्नाथ की ‘मौसी’ का दर्जा मिला और आज के समय में की जानें वाली रथ यात्रा भगवान द्वारा अपनी मौसी को दिए उसी वादे को पूरा करने का तरीका है.
तीनों रथ गुंडिचा मंदिर ही क्यों जाते है?
गुंडिचा मंदिर को सिर्फ भगवान के आराम करने की जगह नहीं माना जाता बल्कि इसका एक और बड़ा महत्व है. माना जाता है कि जब भगवान विश्वकर्मा, जगन्नाथ जी और उनके भाई-बहन की मूर्तियां बना रहे थे तब वे इसी जगह पर काम कर रहे थे.
इस दौरान उनके लिए एक शर्त यह थी कि जब तक मूर्तियां पूरी न हो जाएं कोई कमरा नहीं खोलेगा. लेकिन राजा इंद्रद्युम्न ने उत्सुकता में आकर पहले ही दरवाजा खोल दिया. इस वजह से मूर्तियां अधूरी रह गईं जैसी वे आज दिखती हैं. चूंकि भगवान पहली बार इसी जगह प्रकट हुए थे इसलिए गुंडिचा मंदिर को उनका जन्मस्थान भी माना जाता है और हर साल तीनों का रथ यहां लाया जाता है.
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पूरे 9 दिन रुकने का महत्व
गुंडिचा मंदिर पहुंचने के बाद तीनों भाई-बहन तुरंत वापस नहीं आते बल्कि वहां पूरे 9 दिनों तक मेहमान बनकर रुकते हैं. इन 9 दिनों में मौसी के घर पर उनकी खूब सेवा होती है. उन्हें वहां का खास पारंपरिक पकवान पोडा पीठा जो की एक तरह का मीठा केक है, खिलाया जाता है.
इन 9 दिनों में भगवान के दर्शन करने को ‘आड़प दर्शन’ कहते हैं. माना जाता है कि इन दिनों यहां भगवान के दर्शन करने से बहुत पुण्य मिलता है. इन 9 दिनों तक भगवान अपने बड़े धाम और वैभव को छोड़कर अपने भक्तों को दर्शन देने लिए उनके सामने आते हैं. इसके बाद मौसी के घर समय पूरा होने पर भगवान की वापसी यात्रा शुरू होती है जिसे ‘बहुड़ा यात्रा’ कहते हैं और वे वापस अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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