Purnima Kab Ki Hai: मार्गशीर्ष पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ मानी जाती है, खासकर स्नान और दान करने के लिए. यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व रखता है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु को शंख से स्नान कराना, तुलसी के पत्ते अर्पित करना और गोपी चंदन चढ़ाना उनके कृपालु होने का मार्ग बनाता है. यही नहीं, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती भी मनाई जाती है, जिससे यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से और भी खास बन जाता है.
पूजा का सही समय
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 4 दिसंबर 2025 को सुबह 08:37 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन 5 दिसंबर की तड़के 04:43 बजे तक रहेगी. इसलिए आज ही इस दिन का व्रत रखना चाहिए. इस दिन विशेष रूप से सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का आयोजन किया जाता है. सुबह से ही पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
शाम को चंद्रमा और तुलसी की पूजा
शाम को चंद्रमा की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है. शाम 04:35 बजे चंद्रोदय के समय चंद्रमा को जल, दूध और मिश्री मिलाकर अर्घ्य देने से चंद्र दोष कम होते हैं और व्रत पूरा माना जाता है. अगर आपकी कुंडली में चंद्र कमजोर हैं, तो इस दिन विशेष रूप से पूजा करना लाभकारी रहेगा.
तुलसी माता की पूजा इस दिन विशेष महत्व रखती है. शाम को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए. आप चाहें तो पीपल के पेड़, घर की चौखट या नदियों के किनारे दीपक जला सकते हैं. तुलसी चालीसा का पाठ और ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप भी बहुत शुभ माना जाता है.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को खीर, गुड़ या अन्य मीठे भोग अर्पित करने से वैभव और समृद्धि की प्राप्ति होती है. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में भी सुधार आता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



