Lodheshwar Mahadev temple
Sawan 2025: लोधेश्वर महादेव मंदिर (Lodheshwar Mahadev temple शिव भक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र है. यह दुनियां के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से यह एक है. मंदिर का इतिहास माभारत काल से पहले का है. यहीं पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान यहां एक बड़ा यज्ञ भी किया था. यह रुद्र महायज्ञ माता कुंती ने महर्षि व्यास के सलाह पर किया था. लोधेश्वर मंदिर बाराबंकी के रामनगर में स्थित है. आइए जानते है लोधेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास.
लोधेश्वर महादेव (Lodheshwar Mahadev temple) का इतिहास
कहते हैं महाभारत काल से पहले भगवान शिव की धरती पर प्रकट होने की इच्छा हुई. रामनगर क्षेत्र में लोधेराम अवस्थी एक विद्वान, दयालु और ईश्वरवादी ब्रह्मण था. एक रात उसे बाबा भोलेनाथ ने सपने में दर्शन दिए. अगले दिन लोधेराम अपने खेत में काम कर रहा था. उसे एक गड्ढा दिखाई पड़ा. उसने गड्ढे को मिट्टी से बहुत पाटने का प्रयास किया . अंत में गड्ढे में खूब पानी भी डाला लेकिन वह भी धरती में समा गया. वह कड़ी मेहनत के बाद भी गड्ढे को बंद करने में असफल रहा.
स्वयं प्रकट हुए महादेव
रात को भगवान शंकर ने फिर उसे दर्शन दिए. इस बार भगवान शिव ने उसे बता दिया कि यह मेरा स्थान है. उन्होंने कहा कि उसी गड्ढे की खुदाई करो क्योंकि मुझे प्रकट होना है. यह काम करने से तुम्हारे नाम को प्रसिद्धि मिलेगी. यह सपना देखने के बाद लोधेराम को नींद नहीं आई. वह बहुत ही खुश था कि भगवान शिव उसके सपने में आ रहे हैं. इसके बाद लोधेराम ने बिना देर किए गड्ढे को एक उपकरण से खोदना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में ही उसका उपकरण किसी ठोस पत्थर से टकराया. उसके बाद धीरे धीरे उस पत्थर के पास की मिट्टी आदि को हटाना शुरू किया. अंत में कुछ ही पल में उसके सामने शिवलिंग के रूप में खुद साक्षात भोलेनाथ मौजूद थे.
महादेव का मिला आशीर्वाद शिवभक्त लोधेराम को
यह बात पूरे क्षेत्र में फैल गई. आखिरकार इस स्थान पर सबने मिलकर एक भव्य शिव मंदिर बनाया. इस मंदिर का अर्धनाम लोधे और भगवान शिव के रूप में ईश्वर दिया. इस प्रकार मंदिर भक्त के नाम लोधेश्वर के रूप में प्रसिद्ध हो गया. इसके बाद लोधेराम को प्रभु की कृपा से चार पुत्र भी हुए. इनके नाम महादेवा, लोधौरा, गोबरहा और राजना थे. उस समय इनके नाम से क्षेत्र में चार गांव बसाए गए. ये गांव आज भी मौजूद हैं
यह भी पढ़िए: Sawan 2025: जानिए कहां है भृगु ऋषि द्वारा स्थापित शिवलिंग
पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान किया था लोधेश्वर महादेव में रुद्र महायज्ञ
अज्ञातवास के दौरान पांडव रामनगर के लोधेश्वर मंदिर (Lodheshwar Mahadev temple) भी आए थे. ये जानकारी कई धार्मिक पुस्तकों में भी मिलती है. कहा जाता है कि महर्षि व्यास की सलाह पर कुंती ने यहीं रुद्र महायज्ञ किया था. पांडवो ने मंदिर में एक कूप का भी निर्माण कराया था. इसलिए कूप को लोग पांडव कूप के नाम से जानते हैं. इस कूप का पानी काफी मीठा है. कहते हैं कूप का पानी पीने से बड़ी से बड़ी बीमारी ठीक हो जाती हैं.
रामनगर में स्थित है प्राचीन कल्प वृक्ष जिसे अर्जुन इंद्रलोक से लेकर आए थे.
अज्ञातवास के दौरान पांडव बाराबंकी के रामनगर में थे. उसी दौरान माता कुंती को भगवान शंकर ने सपने में दर्शन दिए और भगवान शिव ने उनसे स्वर्ण के समान पुष्पों को समर्पित करने की इच्छा प्रकट की. बाबा भोलेनाथ के आदेश पर माता कुंती ने पुत्र अर्जुन से पुष्प लाने को कहा. अर्जुन कृष्ण भगवान के मार्गदर्शन में पारिजात वृक्ष को इंद्रलोक से पृथ्वी लाए. पारिजात वृक्ष समुद्र मंथन में प्राप्त हुआ था. इसके पुष्प स्वर्ण पुष्प की तरह दिखते हैं.
भगवान शिव हुए प्रसन्न,दिया माता कुंती को आशीर्वाद
पारिजात वृक्ष के पुष्पों को माता कुंती ने कुंतेस्वर महादेव पर समर्पित किया. इससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने पांडवों को महाभारत में विजयी होने का आशीर्वाद दिया. इस आशीर्वाद से ही पांडवों ने कौरवों पर विजय हासिल की.
पारिजात वृक्ष के पुष्प पेड़ पर सफेद दिखते है. लेकिन पेड़ से टूटने के बाद ये पुष्प सुनहरे रंग के हो जाते हैं. पारिजात वृक्ष रामनगर तहसील के बदोसराय क्षेत्र के बारोलिया गांव में स्थित है. इस देववृक्ष को देखने बहुत दूर दूर से लोग आते हैं.
Lodheshwar Mahadev temple में प्रतिदिन 2 लाख भक्त कर रहे हैं पूजा अर्चना
लोधेश्वर मंदिर में देश भर से कांवड़िएआते हैं. साथ ही वह कांवड़ में पवित्र नदियों का जल लेकर आते हैं और पूरे विधि विधान के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं.
मंदिर के बाहर शिव भक्तों की कई कई किलोमीटर की लाइन लगी हुई हैं. इसीलिए भक्तों को बाबा भोलेनाथ तक पहुंचने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं. इतना समय लगने के बाद भी शिवभक्तों के चेहरे खुशी से भरे हुए हैं. आखिरकार उनको भगवान शिव का आशीर्वाद का मिल रहा है. भगवान शिव उनके कष्टों को भी हर रहे हैं. भीड़ के कारण मंदिर क्षेत्र में काफी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हैं.
Lodheshwar Mahadev temple में लगते हैं साल में चार मेले
तीर्थस्थल Lodheshwar Mahadev temple में चार मेले हर साल लगते हैं. इनमें सावन, फाल्गुनी, अगहनी, कजरी तीज के मेले शामिल हैं. यहां इन मेलों के दौरान भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. इसके अलावा प्रतिदिन भी शिवभक्तों की भारी भीड़ रहती है. इन दिनों मंदिर में सावन का मेला चल रहा है. इसीलिए भीड़ को देखते हुए मेले की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी यहां दिन रात मुस्तैद हैं.
Also Follow Bharat Express on X
–भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

