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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर खास: जानिए चित्तौड़गढ़ के उस मंदिर के बारे में, जहां जहर भी बन गया था अमृत

दुनिया भर में आपको लीलाधर यानी श्रीकृष्ण के कई भव्य मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन राजस्थान के चित्तौड़ में श्रीकृष्ण का ऐसा अद्भुत मंदिर है, जो बेहद खास है. वजह है उनकी परम भक्त मीराबाई, जो यशोदानंदन को अपने प्रियवर के रूप में देखती थीं.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

दुनियाभर में रह रहे करोड़ों हिंदु अनुयायी आज अपने आराध्य श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मना रहे हैं. इस शुभ अवसर पर BharatExpress.Com आपके लिए लाया है विशेष प्रस्तुति. इस आलेख में निहारिए अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित परमभक्त ‘मीराबाई’ के नाम पर बना कृष्ण मंदिर-

राजस्थान के अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित चित्तौड़गढ़ किले के परिसर में मीरा बाई मंदिर भक्ति और आध्यात्मिकता का एक अनुपम केंद्र है.

16वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर इंडो-आर्यन स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट नमूना है, जहां मीरा बाई और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्रेम की कहानी हर दीवार और नक्काशी में जीवंत नजर आती है. यह मंदिर न केवल तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.

कौन थी मीरा बाई?

मीरा बाई राजपूत राजकुमारी, कवयित्री और संत थीं. बचपन से ही वह श्रीकृष्ण को अपना सब कुछ मान चुकी थीं. विवाह के बाद भी उनकी भक्ति अटूट रही. उन्होंने कई कष्ट और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कृष्ण भक्ति से कभी नहीं डिगीं.

किंवदंतियों के अनुसार, उनके ससुराल वाले जब उन्हें मारने की कोशिश करते तो कृष्ण हर बार उन्हें चमत्कारिक रूप से बचा लेते थे. सांप को फूल और जहर को अमृत में बदलकर उन्होंने मीरा की रक्षा की. अंत में मीरा ने राजसी ठाठ-बाट छोड़कर पूर्ण भक्ति का जीवन चुन लिया.

दीवारों पर बारीक नक्काशी

मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक है. इंडो-आर्यन शैली में बने इस मंदिर में सादगी और भव्यता का सुंदर मेल देखने को मिलता है. मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. बाहरी दीवारों पर बारीक नक्काशी की गई है, जिसमें मीरा बाई के जीवन की घटनाएं, उनके भजन और कृष्ण भक्ति के दृश्य उकेरे गए हैं. ये नक्काशियां सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि भक्ति की जीती-जागती कहानी हैं.

भारत सरकार के अतुल्य भारत के अनुसार, मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक विशेष नक्काशी है, पांच मानव शरीर जिनका सिर एक ही है. यह दृश्य विश्व बंधुत्व और समानता का प्रतीक माना जाता है. यह बताता है कि ईश्वर की नजर में सभी जीव एक समान हैं, चाहे उनकी जाति या धर्म कुछ भी हो. मंदिर के गर्भगृह में भगवान कृष्ण की सुंदर मूर्ति स्थापित है. फूलों, मालाओं और भक्तों की श्रद्धा से सजी यह मूर्ति शांति और दिव्यता का अनुभव कराती है.

मंदिर के आसपास का वातावरण इतना पवित्र है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. मीरा बाई मंदिर पूरे वर्ष खुला रहता है. यहां जन्माष्टमी, होली, दीपावली और विशेष रूप से ‘मीरा महोत्सव’ धूमधाम से मनाया जाता है.

-भारत एक्सप्रेस

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