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घर बैठे बाबा महाकाल के अन्नक्षेत्र में दे सकेंगे दान, 4 मई से पूरी व्यवस्था होगी ऑनलाइन; जानें पूरी प्रक्रिया

बाबा महाकाल के दरबार में अन्नदान करना अब और भी आसान होगा. मंदिर प्रशासन 4 मई से डिजिटल प्रणाली लागू कर रहा है, जिससे श्रद्धालु वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे. इस नई व्यवस्था में भक्तों को भगवान को भोग लगाने का विशेष अवसर भी मिलेगा और वे भविष्य की तिथियों के लिए एडवांस बुकिंग भी कर सकेंगे.

Ujjain Mahakal Mandir: अगर आप भी बाबा महाकाल के भक्त हैं और उनके अन्नक्षेत्र में दान करने की इच्छा रखते हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है. विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन अब दान-पुण्य की प्रक्रिया को और भी हाई-टेक बनाने जा रहा है.

आगामी 4 मई 2026 से मंदिर की अन्नदान सेवा पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. इसका मतलब यह है कि अब आपको रसीद कटवाने के लिए मंदिर के चक्कर काटने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी; आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर बस एक क्लिक से इस पुनीत कार्य का हिस्सा बन सकेंगे.

क्यों खास है यह नई व्यवस्था?

अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अपने बुजुर्गों की पुण्यतिथि पर बाबा के दरबार में अन्नदान करना चाहते हैं. लेकिन समय की कमी या दूरी की वजह से कई बार वे ऐसा नहीं कर पाते. मंदिर प्रशासन की इस नई पहल का मकसद इसी दूरी को खत्म करना है. उप प्रशासक सिमी यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि नई ऑनलाइन प्रणाली को बेहद सरल रखा गया है ताकि आम आदमी भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सके.

2 साल पहले ही बुक कर सकेंगे स्लॉट

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘एडवांस बुकिंग’ फीचर है. अब श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार भविष्य की तारीखें पहले से ही सुरक्षित कर सकते हैं. मंदिर प्रशासन ने इसके लिए 2 साल तक का समय दिया है. यानी अगर आप अगले साल की किसी खास तारीख पर अन्नदान करना चाहते हैं, तो उसकी बुकिंग आज ही मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर की जा सकती है.

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पारदर्शिता और श्रद्धा का संगम

डिजिटल होने का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी. भक्तों द्वारा दिया गया दान सीधे बाबा महाकाल के चरणों में समर्पित होगा. मंदिर की परंपरा के अनुसार, इस सेवा के माध्यम से आने वाले अन्न का सबसे पहले भगवान महाकालेश्वर को भोग लगाया जाता है, जिसके बाद इसे मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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