भारत एक बार फिर खेल और संस्कृति के संगम का गवाह बनने जा रहा है. 4 से 8 जून 2026 तक अहमदाबाद के ट्रांसस्टेडिया में पहली ‘वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप’ का आयोजन होगा. इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में दुनिया के 40 से अधिक देशों के एथलीट अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. ‘योगासन भारत’ इस वैश्विक आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जिसका उद्देश्य योग को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है.
खिलाड़ियों का चयन और अभ्यास
भारतीय टीम को चुनने के लिए 1 और 2 मई को हरियाणा के सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) केंद्र में कड़े ट्रायल हुए. इस चयन प्रक्रिया में देशभर के बेहतरीन योग साधकों ने हिस्सा लिया. खिलाड़ियों ने पारंपरिक, कलात्मक (Artistic), लयबद्ध (Rhythmic) और एथलेटिक योगासन जैसी श्रेणियों में अपना दम दिखाया. चुने गए खिलाड़ी अब 10 मई से 2 जून तक अहमदाबाद के नारायणपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में लगने वाले राष्ट्रीय कोचिंग कैंप में पसीना बहाएंगे.
ओलंपिक गेम्स की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए इस चैंपियनशिप का मकसद योगासन को भविष्य में ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनाना है. योगासन भारत के अध्यक्ष उदित सेठ के अनुसार, यह चैंपियनशिप इस खेल के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी. उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहा है जहां योगासन वैश्विक स्तर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय हो सके. यह चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि योगमयी जीवनशैली का एक द्वार है.
कैसे होता है योगासन का मूल्यांकन?
वर्ल्ड योगासन के महासचिव जयदीप आर्य ने बताया कि भारत में योगासन की प्रतिभा तेजी से बढ़ रही है. इस खेल में खिलाड़ियों को उनकी सटीकता, संतुलन, लचीलेपन, शरीर पर नियंत्रण और कठिन आसनों को करने की स्थिरता के आधार पर अंक दिए जाते हैं. यह खेल अनुशासन और एथलेटिक भावना का एक अद्भुत मिश्रण है. जून में होने वाले इस आयोजन में दुनिया भर के अधिकारी और फेडरेशन अहमदाबाद में जुटेंगे, जो भारत के लिए गर्व का क्षण होगा.
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