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‘Ro-Ko’ युग का अंत: भारतीय टेस्ट क्रिकेट का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त

2025 में विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहकर भारतीय क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का समापन किया. ये विदाई भावनाओं से भरी, गरिमापूर्ण और क्रिकेट इतिहास में स्थायी छवि छोड़ने वाली रही.

Kohli Rohit Era End
Edited by Akansha

शाहिद सईद\वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक

2025 भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक परिवर्तनकारी वर्ष के रूप में दर्ज होगा—एक भावुक पूर्णविराम, एक गौरवशाली वाक्य का समापन. बिना किसी भव्य विदाई या चमकदार समारोह के, आधुनिक क्रिकेट के दो दिग्गज—विराट कोहली और रोहित शर्मा—शालीनता से टेस्ट क्रिकेट के मंच से विदा हो गए. उनका फैसला मौन, गरिमापूर्ण और अत्यंत निजी था, जो खेल के प्रति उनके सम्मान और विनम्रता को दर्शाता है. यह सिर्फ एक युग का अंत नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है.

विराट कोहली ने भारत की टेस्ट महत्वाकांक्षाओं को नई परिभाषा दी. 123 टेस्ट मैचों में उन्होंने 9,230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं. कप्तान के रूप में उन्होंने टीम की मानसिकता बदल दी—आक्रामकता, आत्मविश्वास और विदेशी धरती पर जीतने की भूख को जगाया. कप्तान रहते हुए 68 टेस्ट में 40 जीत उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण हैं, जहां हुनर और तीव्रता का मेल दिखा. उनके नेतृत्व में भारत ने सिर्फ मुकाबला नहीं किया, बल्कि दबदबा कायम किया—ऑस्ट्रेलिया में लगातार टेस्ट सीरीज़ जीत से लेकर इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका में ज़ोरदार प्रदर्शन तक, विराट का युग स्वर्णिम युग कहलाएगा.

रोहित शर्मा, जिन्हें “हिटमैन” के नाम से जाना जाता है, ने 2019 के बाद टेस्ट क्रिकेट में बतौर ओपनर अपना असली रंग दिखाया. 59 टेस्ट मैचों में उन्होंने 3,974 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 16 अर्धशतक शामिल हैं—अनेक रन कठिन विदेशी हालात में बने. कप्तान के रूप में उन्होंने भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचाया और दक्षिण अफ्रीका व वेस्ट इंडीज़ जैसे मुश्किल दौरों का सफल नेतृत्व किया. उनकी शांत मौजूदगी, रणनीतिक सोच और अनुकूलता ने संक्रमण काल की टीम को संतुलन दिया.

छोटे प्रारूपों में भी उनकी महानता किसी से कम नहीं रही

विराट कोहली के T20I आंकड़े—117 मैचों में 4,188 रन, औसत 48.69 और स्ट्राइक रेट 137.04—1 शतक और 38 अर्धशतकों के साथ सजे हैं. दबाव में उनका संयम उन्हें टीम का संकटमोचक बनाता रहा, खासकर विश्व कप जैसे बड़े मौकों पर. भारत की 2024 टी20 विश्व कप जीत में उनका योगदान निर्णायक था.

वहीं, रोहित शर्मा ने T20 क्रिकेट में छक्कों की बारिश को एक कला बना दिया. 159 टी20 मैचों में 4,231 रन, 5 शतक—जो कि इस फॉर्मेट में सर्वाधिक हैं—और लगभग 140 की स्ट्राइक रेट. एक कप्तान के रूप में उन्होंने निडर और लाजवाब टीम बनाई जिसने दिल भी जीते और सुर्खियां भी.

उनके वनडे आंकड़े तो मानो क्रिकेट की लोककथाएं बन चुके हैं

विराट कोहली: 292 मैचों में 13,848 रन, 50 शतक, 72 अर्धशतक, औसत 58.67.
रोहित शर्मा: 262 मैचों में 10,709 रन, 31 शतक, 55 अर्धशतक, औसत 49.12.

विराट और रोहित ने मिलकर भारत को दिलाई ICC ट्रॉफियां

इन दोनों ने मिलकर भारत को चार बड़ी ICC ट्रॉफियां दिलाईं—2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप, 2013 चैंपियंस ट्रॉफी और 2024 टी20 विश्व कप. ये केवल मेडल नहीं हैं—ये भारत की खेल चेतना के मील के पत्थर हैं. हर जीत ने एक ऐसे दौर की कहानी कही, जिसने क्रिकेट को खेल नहीं, बल्कि देशभक्ति का मिशन माना.

नई पीढ़ी की ओर टिक हैं निगाहें

अब जब टेस्ट क्रिकेट में इनका सफर पूरा हो गया है, तो नई पीढ़ी की ओर निगाहें टिक गई हैं—शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन और केएल राहुल. ये सभी प्रतिभावान हैं, लेकिन असली कसौटी अब शुरू होती है—कठिन सत्रों में टिकना, मैच जिताऊ पारियां बनाना, और विरासत का भार उठाना.

गेंदबाज़ी में भारत के पास उम्मीद की किरणें हैं. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल मोर्चे पर हैं, और रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, शिवम दुबे जैसे ऑलराउंडर्स से संतुलन बनता है. खासकर जडेजा और अक्षर इस बदलाव के दौर में मुख्य स्तंभ होंगे.

कोहली और रोहित ने वनडे क्रिकेट को नहीं कहा अलविदा

गौरतलब है, कोहली और रोहित ने वनडे क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा है. उनकी फिटनेस, कौशल और भूख आज भी बरकरार है. जैसे-जैसे 2027 वनडे वर्ल्ड कप नज़दीक आएगा, फैंस एक आखिरी सुनहरा विदाई दृश्य देखने का सपना ज़रूर देखेंगे—दो महानतम सितारों की अंतिम चमक.

यह पल अंत नहीं, बल्कि मशाल सौंपने का क्षण है. रोहित और विराट सिर्फ आंकड़े नहीं थे, वे भारतीय क्रिकेट के सबसे आत्मविश्वास दौर की आत्मा थे. उनका टेस्ट से जाना किसी रोमांचक रात के बाद की सुबह की शांति जैसा लगता है—मौन, भावुक, पर उम्मीदों से भरा. अब सूरज नई पीढ़ी पर उग रहा है, लेकिन “रो-को” युग की चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी.

-भारत एक्सप्रेस 



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